स्पोर्ट्स डेस्क, शिवेश कुमार शौर्य।
सारब्रुकेन: भारतीय बैडमिंटन के लिए जर्मनी में रविवार का दिन यादगार बन गया। पीवी सिंधु और लक्ष्य सेन ने हाइलो ओपन 2026 में भारत को दोनों सिंगल्स खिताब दिला दिए। सिंधु ने महिला सिंगल्स के फाइनल में डेनमार्क की लाइन क्याएर्सफेल्ट को सीधे गेम में 21-12, 21-14 से हराकर पहली बार यह ट्रॉफी अपने नाम की। इसके बाद लक्ष्य सेन ने इंडोनेशिया के जोनाटन क्रिस्टी को 21-17, 21-10 से मात देकर पुरुष सिंगल्स का खिताब जीत लिया।
एक ही दिन भारत की झोली में दोनों सिंगल्स ट्रॉफियां आईं और इस तरह हाइलो ओपन 2026 भारतीय बैडमिंटन के लिए डबल खिताबी जश्न में बदल गया।
पहले सिंधु ने खोला जीत का दरवाजा
सिंधु ने फाइनल में शुरुआत से ही अपना दबदबा बनाए रखा। क्याएर्सफेल्ट ने शुरुआती दौर में मुकाबला बराबरी पर रखने की कोशिश की, लेकिन सिंधु ने धीरे-धीरे रफ्तार बढ़ाई और पहला गेम 21-12 से अपने नाम कर लिया।
दूसरे गेम में डेनमार्क की खिलाड़ी ने वापसी की कोशिश की। एक समय स्कोर 7-6 तक पहुंचा, लेकिन सिंधु ने इसके बाद लगातार दबाव बनाया। ब्रेक तक वह 11-7 से आगे थीं और फिर बढ़त को 19-11 तक ले गईं। क्याएर्सफेल्ट ने आखिरी दौर में कुछ अंक जरूर जुटाए, लेकिन सिंधु ने मौका नहीं दिया और 21-14 से गेम जीतकर खिताब पर कब्जा कर लिया।
बिना गेम गंवाए बनीं चैंपियन
सिंधु की इस जीत की खासियत सिर्फ फाइनल नहीं, बल्कि पूरा टूर्नामेंट रहा। भारतीय स्टार ने पूरे हाइलो ओपन में एक भी गेम गंवाए बिना खिताब जीता।
उन्होंने पहले दौर में प्रकृति भरत को 21-10, 21-10, दूसरे दौर में रोसी ओक्ताविया पंकासारी को 21-9, 21-6, क्वार्टर फाइनल में जर्मनी की अमाली शुल्ज को 21-12, 21-10 और सेमीफाइनल में भारत की अनमोल खरब को 21-13, 21-16 से हराया।
यानी फाइनल तक पहुंचने के दौरान सिंधु ने हर मुकाबला सीधे गेम में जीता और फिर खिताबी मुकाबले में भी यही सिलसिला जारी रखा।
सिंधु के लिए 2026 का दूसरा खिताब
हाइलो ओपन की ट्रॉफी 2026 में सिंधु का दूसरा बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड टूर खिताब है। इससे पहले उन्होंने जुलाई में जापान ओपन जीता था।
इसके अलावा सिंधु पिछले सप्ताह फ्रेंच ओपन के फाइनल में भी पहुंची थीं, जहां उन्हें दक्षिण कोरिया की दुनिया की नंबर-1 खिलाड़ी अन से-यंग के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा था। फ्रांस में उपविजेता रहने के ठीक एक सप्ताह बाद जर्मनी में खिताब जीतना सिंधु के लिए शानदार वापसी है।
लक्ष्य सेन ने खत्म किया लंबा खिताबी इंतजार
सिंधु के बाद लक्ष्य सेन ने भारत के लिए दूसरा खिताब पक्का किया। सामने थे इंडोनेशिया के जोनाटन क्रिस्टी, जो टूर्नामेंट के चौथी वरीयता प्राप्त खिलाड़ी और गत चैंपियन थे।
लक्ष्य ने पहला गेम 21-17 से जीता। क्रिस्टी ने वापसी की कोशिश जरूर की, लेकिन भारतीय खिलाड़ी ने दबाव में धैर्य बनाए रखा और निर्णायक मौकों पर बेहतर खेल दिखाते हुए गेम अपने नाम कर लिया।
दूसरे गेम में लक्ष्य ने पूरी तरह नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया। उन्होंने क्रिस्टी की गलतियों का फायदा उठाया, रैलियों पर पकड़ बनाए रखी और लगातार दबाव बढ़ाते हुए गेम 21-10 से जीत लिया।
करीब एक साल बाद फिर चैंपियन बने लक्ष्य
लक्ष्य सेन के लिए यह जीत बेहद खास है। उन्होंने नवंबर 2025 के ऑस्ट्रेलियन ओपन के बाद पहली बार बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड टूर खिताब जीता है।
करीब एक साल के इंतजार के बाद मिली यह ट्रॉफी लक्ष्य के लिए आत्मविश्वास बढ़ाने वाली जीत है। इस सीजन में प्रदर्शन में उतार-चढ़ाव के बाद उन्होंने हाइलो ओपन में लगातार बेहतर खेल दिखाया और आखिरकार ट्रॉफी अपने नाम की।
हाइलो ओपन में लक्ष्य का दूसरा ताज
यह लक्ष्य सेन का हाइलो ओपन में दूसरा खिताब है। इससे पहले उन्होंने 2021 में भी इस टूर्नामेंट का पुरुष सिंगल्स खिताब जीता था। इस जीत के साथ लक्ष्य हाइलो ओपन पुरुष सिंगल्स खिताब दो बार जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं। यह उनका सातवां बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड टूर खिताब भी है। क्रिस्टी के खिलाफ जीत के बाद दोनों खिलाड़ियों का करियर आमने-सामने का रिकॉर्ड भी 4-4 हो गया।
भारत के लिए क्यों खास रहा हाइलो ओपन?
इस टूर्नामेंट की सबसे बड़ी कहानी सिर्फ दो अलग-अलग जीत नहीं, बल्कि एक ही टूर्नामेंट में भारत का महिला और पुरुष सिंगल्स दोनों खिताब जीतना है। सिंधु ने पूरे टूर्नामेंट में बिना गेम गंवाए ट्रॉफी उठाई, जबकि लक्ष्य ने गत चैंपियन जोनाटन क्रिस्टी को सीधे गेम में हराकर अपना दूसरा हाइलो ओपन खिताब जीता। दोनों खिलाड़ियों की जीत का अपना अलग महत्व भी है। सिंधु ने फ्रेंच ओपन की हार के एक सप्ताह बाद खिताब जीतकर शानदार वापसी की, वहीं लक्ष्य ने करीब एक साल के खिताबी इंतजार को खत्म किया। एक दिन, दो फाइनल और भारत के नाम दो ट्रॉफियां—हाइलो ओपन 2026 भारतीय बैडमिंटन के लिए यादगार डबल के साथ खत्म हुआ।







