नेशनल डेस्क, श्रेयांश पराशर।
जयपुर। भारत की मेजबानी में राष्ट्रमंडल देशों की संसदों के अध्यक्षों एवं पीठासीन अधिकारियों का 28वां सम्मेलन (सीपीसीओसी) देश की प्राचीन परंपरा “अतिथि देवो भव:” का सशक्त प्रतीक बनकर सामने आया है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने जयपुर में आयोजित विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान कहा कि यह सम्मेलन भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोकतांत्रिक मूल्यों और आपसी सहयोग की भावना को वैश्विक मंच पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करता है।
ओम बिरला ने कहा कि भारत विविधताओं से भरा एक विशाल देश है, जहां भौगोलिक, भाषाई, खानपान और सांस्कृतिक विविधता के साथ-साथ ऐतिहासिक विरासत की भी अद्वितीय समृद्धि देखने को मिलती है। देश के विभिन्न राज्यों में प्राचीन सभ्यताएं और परंपराएं आज भी जीवंत रूप में विद्यमान हैं। उन्होंने राजस्थान की विशेषताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि यह प्रदेश शौर्य, वीरता और आत्मसम्मान की भूमि रहा है, जहां महाराणा प्रताप जैसे महान योद्धाओं ने संघर्षों के बावजूद कभी अपने स्वाभिमान से समझौता नहीं किया।
कार्यक्रम में राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने राष्ट्रमंडल देशों से आए संसदीय प्रतिनिधिमंडलों का स्वागत करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संवाद और आपसी मेल-मिलाप से देशों के बीच सांस्कृतिक निकटता बढ़ती है, जिससे आपसी भाईचारा और आत्मीयता मजबूत होती है। उन्होंने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए “पधारो म्हारे देश” की भावना के साथ राजस्थान की धरती पर स्वागत किया।
इस अवसर पर राजस्थान की समृद्ध लोक-परंपरा, लोक-संगीत एवं शास्त्रीय नृत्य की आकर्षक प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रदेश की सांस्कृतिक विविधता को मंच पर जीवंत किया गया। घूमर, चंग-धाप, कथक, भवाई नृत्य और लांगामंगनियार गायन ने विदेशी प्रतिनिधियों को विशेष रूप से आकर्षित किया।
उल्लेखनीय है कि सीपीसीओसी सम्मेलन में भाग लेने के उपरांत राष्ट्रमंडल देशों के संसदीय प्रतिनिधि दो दिवसीय भ्रमण कार्यक्रम के तहत जयपुर पहुंचे हैं। इस दौरान राज्यपाल हरिभाऊ किसनराव बागड़े, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, मंत्रिमंडल के सदस्य, सांसद, विधायक एवं अन्य गणमान्य लोग भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।







