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सूखे खेतों को मिली साँस, पर फसल को अब भी चाहिए आसमान से बरसता विश्वास

लोकल डेस्क, एन.के. सिंह |

इंद्रदेव की हल्की कृपा से मिली राहत, मगर किसानों को अब भी है जोरदार बारिश की आस

पूर्वी चंपारण: आसमान ने थोड़ी मेहरबानी दिखाई और पिछले कुछ दिनों से हो रही रुक-रुक कर हल्की बारिश ने पूर्वी चंपारण के किसानों को थोड़ी राहत दी है। सोमवार देर रात से शुरू हुई यह बारिश रविवार शाम तक चली, जिससे खेतों की फटी हुई धरती को संजीवनी मिली है। लंबे समय से सूखे की मार झेल रहे किसानों के चेहरों पर फिर से मुस्कान लौट आई है, लेकिन उनकी निगाहें अब भी आसमान की ओर हैं — अबकी बार जोरदार बारिश की आस बाकी है।

सूख चुकी दरारें पिघलने लगीं, पर मिटने का इंतजार जारी

मोतिहारी समेत जिले के विभिन्न इलाकों में हुई हल्की बारिश से खेतों की दरारों में थोड़ी नमी लौटी है और सूख चुके धान के बिचड़ों में हरियाली की आशा फिर जगी है। किसान मानते हैं कि यह बारिश एक नई शुरुआत है, लेकिन अभी वह बारिश नहीं हुई है जो फसलों को पूरी तरह जीवनदान दे सके।

"हलकी सी बारिश आई, थोड़ी राहत ले आई।
पर दरारें वैसी ही, उम्मीद धुंधली छाई।"

नदियों की हालत: कहीं खतरे की घंटी, कहीं पानी को तरसती धाराएं

बारिश भले हुई हो, लेकिन नदियों की स्थिति अब भी चिंताजनक है। डुमरिया घाट पर नारायणी नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, जिससे तटीय इलाकों में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। वहीं दूसरी ओर बागमती और लाल बकैया जैसी नदियों में जलस्तर बेहद कम है। लाल बकैया लगभग सूख चुकी है, और बूढ़ी गंडक भी सामान्य से नीचे बह रही है। यह दर्शाता है कि इलाके में जल संकट पूरी तरह से टला नहीं है।

भूजल स्तर में सुधार की उम्मीद, पीने के पानी के संकट में मिल सकती है राहत

जिले के कई प्रखंडों में महीनों से पीने के पानी की किल्लत बनी हुई थी। हैंडपंप और सबमर्सिबल ने जवाब देना शुरू कर दिया था। हल्की बारिश से भूजल स्तर में कुछ सुधार की उम्मीद बनी है, जिससे पीने के पानी के लिए तरस रहे लोगों को थोड़ी राहत मिल सकती है।

"मिलेगा पानी पीने, सूखे कंठों को।
मिल जाएगी राहत, दुखी किसानों को।
दोहरी मार झेल रहे, हैं वे बेबस और उदास।
पर आशा है अभी भी, पूरी होगी उनकी आस।"

धान की रोपाई में मिली रफ्तार, किसान उम्मीद से लबरेज

बारिश के बाद सबसे ज्यादा राहत उन किसानों को मिली है जो धान की रोपाई अधूरी छोड़ चुके थे। अब मिट्टी में थोड़ी नमी लौटने से धान की रोपनी का काम फिर से तेज़ी पकड़ रहा है। जिला कृषि कार्यालय के मुताबिक, करीब 90% रोपाई पूरी हो चुकी है और अगर अगले कुछ दिनों में और बारिश हुई तो यह लक्ष्य शत-प्रतिशत तक पहुँच सकता है।

मौसम विभाग की भविष्यवाणी: दो दिन और राहत संभव

मौसम विज्ञान केंद्र ने पूर्वानुमान जताया है कि अगले 48 घंटों में हल्की से मध्यम बारिश जारी रह सकती है। यदि ऐसा होता है, तो जिले के किसानों के लिए यह मौसमी राहत एक स्थायी समाधान की ओर पहला कदम साबित हो सकती है।

बारिश की ये शुरुआती बूंदें पूर्वी चंपारण के किसानों के लिए उम्मीद की किरण लेकर आई हैं, लेकिन खेत अब भी प्यासे हैं और फसलें अब भी मेघों की ओर टकटकी लगाए देख रही हैं। राहत की शुरुआत हो चुकी है, लेकिन असली राहत उस दिन मिलेगी जब बारिश जोरदार होगी और हर खेत, हर कुआं और हर दिल पानी से भर जाएगा।