बिजनेस डेस्क, मुस्कान कुमारी।
नई दिल्ली। सोने की कीमतों ने सोमवार को इतिहास रच दिया, जब हाजिर सोना 5110.50 डॉलर प्रति औंस के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया। भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और व्यापार युद्ध की आंच में निवेशक सुरक्षित आश्रय की ओर दौड़े, जिससे कीमतों में 2.2 फीसदी का उछाल आया।
सोने की यह रैली 2025 में 64 फीसदी की वार्षिक बढ़त के बाद जारी है, जो 1979 के बाद सबसे बड़ी है। अमेरिकी मौद्रिक नीति में ढील, केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीदारी और एक्सचेंज-ट्रेडेड फंडों में रिकॉर्ड निवेश ने इस उछाल को हवा दी। चीन ने दिसंबर में लगातार 14वें महीने सोना खरीदा, जो वैश्विक मांग को दर्शाता है। इस साल अब तक कीमतें 18 फीसदी से ज्यादा चढ़ चुकी हैं, लगातार नए रिकॉर्ड बनाते हुए।
ट्रंप की टैरिफ धमकियां: व्यापार युद्ध की नई लहर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियां वैश्विक अर्थव्यवस्था को झकझोर रही हैं। जनवरी में पदभार संभालने के बाद ट्रंप प्रशासन ने दुश्मनों और सहयोगियों दोनों पर टैरिफ थोपे, जिससे सप्लाई चेन बिखर गईं और कारोबारी लागत बढ़ गई। कुछ मामलों में 50 फीसदी तक के टैरिफ ने अधिकांश देशों को चोट पहुंचाई है। ट्रंप खुद इन टैरिफों से सरकारी राजस्व बढ़ने का दावा करते हैं, लेकिन आलोचक इसे भू-राजनीतिक हथियार बताते हैं।
पिछले हफ्ते ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर कब्जे के लिए यूरोपीय सहयोगियों पर टैरिफ की धमकी वापस ली, लेकिन कनाडा पर 100 फीसदी टैरिफ की नई चेतावनी दी। यह धमकी कनाडा के चीन के साथ हालिया व्यापार समझौते के बाद आई, जिसमें कृषि उत्पाद और इलेक्ट्रिक वाहनों का व्यापार शामिल है। ट्रंप ने इसे अमेरिकी हितों के खिलाफ बताया। इसके अलावा, फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को गाजा के लिए 'बोर्ड ऑफ पीस' पहल में शामिल करने के लिए फ्रांसीसी वाइन और शैंपेन पर 200 फीसदी टैरिफ की धमकी दी गई।
ये कदम 1930 के दशक के बाद सबसे बड़े व्यापार व्यवधान पैदा कर रहे हैं। वैश्विक व्यापार में बाधाएं बढ़ने से निवेशक जोखिम से बचने के लिए सोने की ओर मुड़े। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि ये अनिश्चितताएं कीमतों को और ऊपर ले जा सकती हैं।
डॉलर की कमजोरी और येन की मजबूती: बाजार की हलचल
सोमवार को येन की बढ़त ने डॉलर को दबाया, जिससे अन्य मुद्राओं के धारकों के लिए डॉलर-मूल्य वाला सोना सस्ता हो गया। बाजार जापानी मुद्रा में हस्तक्षेप की आशंका से सतर्क हैं, जबकि निवेशक फेडरल रिजर्व की इस हफ्ते की बैठक से पहले डॉलर पोजीशन काट रहे हैं।
फरवरी डिलीवरी के लिए अमेरिकी सोना वायदा भी 2.2 फीसदी चढ़कर 5086.30 डॉलर प्रति औंस पर पहुंचा। पिछले हफ्ते कीमतों ने लगातार रिकॉर्ड तोड़े, जो वैश्विक तनावों का सीधा असर है।
चांदी की चमक: 100 डॉलर पार का सफर
चांदी ने भी शुक्रवार को 100 डॉलर प्रति औंस का आंकड़ा पार किया, जो पहली बार हुआ। पिछले साल 147 फीसदी की बढ़त के बाद यह रैली खुदरा निवेशकों की मांग, गति-आधारित खरीदारी और भौतिक बाजार में लंबे समय से चली कमी से मजबूत हुई। चांदी की यह तेजी सोने की रैली को पूरक बना रही है, दोनों धातुओं में निवेशकों का विश्वास बढ़ा।
केंद्रीय बैंकों की भूमिका: स्थिरता की तलाश
केंद्रीय बैंक सोने की खरीदारी में अग्रणी रहे। चीन की 14 महीनों की लगातार खरीद वैश्विक मांग का बड़ा हिस्सा है। अमेरिकी फेड की नीति में ढील ने ब्याज दरों को नीचे रखा, जो सोने जैसी गैर-उपज वाली संपत्ति को आकर्षक बनाती है। एक्सचेंज-ट्रेडेड फंडों में रिकॉर्ड इनफ्लो ने कीमतों को सहारा दिया।
विश्लेषकों का कहना है कि अगर ट्रंप की टैरिफ नीतियां जारी रहीं, तो सोना 5500 डॉलर तक जा सकता है। लेकिन बाजार में उतार-चढ़ाव की आशंका भी है, खासकर फेड की बैठक के बाद।







