Ad Image
Ad Image
पुलिस ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत कई वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं को हिरासत में लिया || PM के आवास के बाहर पेपर लीक और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को लेकर धरने पर राहुल गांधी || PM मोदी के आवास के बाहर धरने पर राहुल गांधी समेत कांग्रेस के सभी दिग्गज || अमेरिकी और ईरान के बीच प्रारंभिक समझौता, 60 दिन का सीजफायर लागू || अमेरिकी सेंट्रल कमान की घोषणा, ईरान की नाकेबंदी समाप्त || ईरान - अमेरिका में टकराव चरम पर, नए हमलों से सीजफायर पर लग सकता ब्रेक || जापान: तूफान जोंगमी ने मचाई तबाही, 60 हजार से अधिक घरों में बिजली गुल || जयराम रमेश ने लिखा पत्र, ग्रेट निकोबार परियोजना पर पुनर्विचार की अपील || नई दिल्ली के मालवीय नगर स्थित रेस्टोरेंट में आग से 20 की मौत, दर्जनों घायल || ट्रंप ने कहा, खाड़ी देशों की अपील पर ईरान पर हमले बंद किए गए

The argument in favor of using filler text goes something like this: If you use any real content in the Consulting Process anytime you reach.

  • img
  • img
  • img
  • img
  • img
  • img

Get In Touch

स्वयं का समर्पण ही परमात्मा की प्राप्ति है: बिमल सर्राफ

लोकल डेस्क, ऋषि राज।

रक्सौल: परमात्मा ने इस जगत में हर किसी को अलग स्वभाव देकर एक दूसरे के साथ सामंजस्य बनाकर जीवन जीने का आदेश दिया है।उक्त बातें लायंस क्लब ऑफ रक्सौल के अध्यक्ष सह मीडिया प्रभारी सह सामाजिक कार्यकर्ता एवं भारत विकास परिषद् , रक्सौल के सेवा संयोजक सह मीडिया प्रभारी बिमल सर्राफ ने प्रेस से साझा की।ईश्वर के आदेश का जो जितनी सफलता से पालन कर लेते, ईश्वर उनके जीवन को उतना ही सरल और खुशियों से भर देते हैं,वरना परस्पर राग द्वेष और वैमनस्यता के विकारों के साथ ही हम अपनी पुरी आयु क्षीण करके वापस अधर्म स्थिति में जाने के लिए यहां से लौट जाते और बड़े ही घाटे का सौदा साबित होता ये जीवन। हमारा ये दुर्लभ मानव जीवन,हमारी मानव जीवन की योग्यता की कसौटी संसार से तालमेल बिठाने में ही पहचानी जाती,शेष खूबियां तो भौतिक सुखों के संचय में काम आती है। एक इच्छा के पूरे होते ही दूसरी इच्छा का जन्म हो जाना ही मानव मन का स्वभाव है। मनुष्य आवश्यकता से नहीं अपितु अनंत इच्छा से दुःखी रहता है।आवश्यकता कभी भी पूर्ण हो सकती लेकिन इच्छा का पूर्ण होना कभी संभव ही नहीं है।इच्छाएं आज तक बड़े-बड़े चक्रवर्ती सम्राट की भी पूरी नहीं हुई है।आज हमारी स्थिति यह है कि जो प्राप्त है,उसका आनंद नहीं लेते लेकिन जो प्राप्त नहीं है उसकी चिंता करके जीवन को शोकमय कर देते हैं। आपका जीवन भी एक मधुमक्खी के सामान है जो द्वार खुला होने के बावजूद बाहर निकलने के लिए दीवार से टकराती रहती है।कौन उसे समझाए,नासमझ रुक जहां से तेरा आना हुआ है,द्वार वही है,आपका हृदय भी परमात्मा से खाली है,अब परमात्मा को पाने के लिए कुछ नहीं करना है बस स्वयं से खाली हो जाना है। चित्त जब शांत होता है और देखता है तो द्वार मिल जाता है।शांत और शून्य चित्त ही द्वार है।मिली हुई खुशी को जी भर के जिएँ।जिन्दगी के रंगमंच पर कोई भी अभिनय दोहराया नही जाता।ये बातें हम जितनी जल्दी समझ लें,अपना जीवन आनंदमय कर सकते हैं।