नेशनल डेस्क, शुभम कुमार तिवारी।
- अमेरिकी न्याय विभाग की ओर से जारी तस्वीरों के बाद विपक्ष ने मांगा जवाब, पुरी पहले ही मुलाकातों को पेशेवर और प्रतिनिधिमंडल से जुड़ा बता चुके हैं।
नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और अमेरिकी फाइनेंसर जेफ्री एपस्टीन की तस्वीरें सामने आने के बाद भारतीय राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी समेत विपक्ष के कई नेताओं ने इन तस्वीरों और पुरी के एपस्टीन के साथ पुराने संपर्कों को लेकर सवाल उठाए हैं। विवाद ने उस समय और तूल पकड़ लिया, जब राहुल गांधी ने तस्वीर जारी होने के समय को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की मुंबई यात्रा से जोड़कर सवाल किया कि अमेरिका किसे ब्लैकमेल करने की कोशिश कर रहा है।
21 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका के न्याय विभाग (DOJ) की ओर से जारी सामग्री में पुरी और एपस्टीन की तस्वीर सामने आने के बाद कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने मंत्री से उनके पुराने संपर्कों के बारे में स्पष्टीकरण मांगा है। हालांकि, तस्वीर में किसी व्यक्ति का दिखाई देना अपने आप में किसी अपराध में संलिप्तता का प्रमाण नहीं है।
राहुल गांधी ने तस्वीर जारी होने के समय पर उठाए सवाल
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट करते हुए मार्को रुबियो की मुंबई यात्रा और पुरी-एपस्टीन की तस्वीर जारी होने के समय का उल्लेख किया। उन्होंने भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के समर्थकों को संबोधित करते हुए सवाल किया कि अमेरिका किसे ब्लैकमेल कर रहा है।
राहुल गांधी की टिप्पणी ने इस मामले को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। हालांकि, उनके बयान में ब्लैकमेलिंग के आरोप के समर्थन में कोई स्वतंत्र प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया। इसलिए इस टिप्पणी को विपक्ष द्वारा उठाए गए राजनीतिक सवाल के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
हरदीप सिंह पुरी ने पहले क्या सफाई दी थी?
हरदीप सिंह पुरी ने 11 फरवरी 2026 को अपनी और एपस्टीन की मुलाकातों को लेकर सफाई दी थी। उन्होंने कहा था कि उनकी मुलाकातें इंटरनेशनल पीस इंस्टीट्यूट (IPI) से जुड़े काम और प्रतिनिधिमंडल के संदर्भ में हुई थीं। पुरी के अनुसार, उन्होंने एपस्टीन से तीन या अधिकतम चार बार मुलाकात की थी।
पुरी ने यह भी कहा था कि इन संपर्कों का एपस्टीन के आपराधिक कृत्यों से कोई संबंध नहीं था। उस समय उन्होंने अपने संपर्कों को पेशेवर बताया और कहा कि ये मुलाकातें 2017 में केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल होने से पहले हुई थीं।
अब नई तस्वीरों के सामने आने के बाद विपक्ष उनके पुराने बयान और मुलाकातों की परिस्थितियों पर फिर से सवाल उठा रहा है।
कांग्रेस ने ईमेल और मुलाकातों की संख्या पर मांगा जवाब
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने दावा किया कि अमेरिकी न्याय विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध दस्तावेजों में पुरी और एपस्टीन के बीच 62 ईमेल का आदान-प्रदान दर्ज है। उन्होंने 14 मुलाकातों और व्यापक संपर्कों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि सामने आई सामग्री विपक्ष के सवालों को और गंभीर बनाती है।
तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने भी पुरी के पुराने बयान पर सवाल उठाए। उन्होंने सोशल मीडिया पर तस्वीरें साझा करते हुए पूछा कि यदि मुलाकातें केवल प्रतिनिधिमंडल के हिस्से के रूप में हुई थीं, तो तस्वीरों में दिखाई देने वाली परिस्थितियों की पूरी जानकारी क्या है।
ये आंकड़े और विपक्ष के आरोप स्वतंत्र रूप से दस्तावेजों की जांच के अधीन हैं। ईमेल की संख्या, किसी मुलाकात का उल्लेख और वास्तविक मुलाकातों की संख्या एक ही बात नहीं हैं। इसी तरह, किसी बैठक की तस्वीर से उसका पूरा संदर्भ या उसमें हुई बातचीत का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
जेफ्री एपस्टीन कौन था?
जेफ्री एपस्टीन एक अमेरिकी फाइनेंसर था, जिसे नाबालिगों के यौन शोषण से जुड़े अपराधों में दोषी ठहराया गया था। उसके राजनीतिक, कारोबारी और सामाजिक क्षेत्रों के कई प्रभावशाली लोगों से संपर्क रहे थे। 2019 में संघीय यौन तस्करी के आरोपों के तहत मुकदमे की प्रतीक्षा के दौरान न्यूयॉर्क की जेल में उसकी मौत हो गई थी।
एपस्टीन से जुड़े दस्तावेजों और संपर्कों को लेकर कई देशों में सार्वजनिक हस्तियों की भूमिका पर सवाल उठते रहे हैं। लेकिन किसी व्यक्ति का एपस्टीन से संपर्क या मुलाकात होना अपने आप में उसके अपराधों में शामिल होने का सबूत नहीं है। किसी भी आरोप का आकलन संबंधित दस्तावेजों, संदर्भ और स्वतंत्र रूप से सत्यापित साक्ष्यों के आधार पर किया जाना चाहिए।
अब आगे क्या?
ताजा तस्वीरों के सामने आने के बाद पुरी के पुराने संपर्कों, मुलाकातों की परिस्थितियों और सार्वजनिक रूप से दिए गए बयानों पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। विपक्ष इस मामले में अधिक पारदर्शिता और स्पष्ट जवाब की मांग कर रहा है।
इस विवाद के केंद्र में अब तीन प्रमुख सवाल हैं—पुरी और एपस्टीन के बीच वास्तविक संपर्क कितना था, जारी तस्वीरों का पूरा संदर्भ क्या है और क्या सार्वजनिक दस्तावेजों से विपक्ष के दावों की पुष्टि होती है? इन सवालों पर निष्कर्ष निकालने के लिए संबंधित मूल दस्तावेजों और सभी पक्षों के स्पष्टीकरण का परीक्षण जरूरी है।







