स्टेट डेस्क - वेरॉनिका राय
देहरादून: उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने पार्टी में अपने दो पदों से इस्तीफा देने की इच्छा जताई है। हालांकि, उन्होंने अभी तक औपचारिक रूप से इस्तीफा नहीं दिया है। रावत ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए अपनी बात सामने रखी और कहा कि वह नहीं चाहते कि उनकी वजह से कांग्रेस के भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे संघर्ष पर किसी तरह का सवाल खड़ा हो।
हरीश रावत का यह बयान ऐसे समय आया है जब उनके करीबी सहयोगी के ठिकाने पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई हुई है। इस कार्रवाई के अगले ही दिन रावत की सोशल मीडिया पोस्ट सामने आने के बाद उत्तराखंड की राजनीति में इसे लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
सोशल मीडिया पोस्ट में क्या बोले रावत?
हरीश रावत ने फेसबुक पोस्ट के जरिए अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में वह कांग्रेस के दो पदों से मुक्त होना चाहते हैं। उनके बयान में पार्टी की छवि और भ्रष्टाचार के खिलाफ कांग्रेस की लड़ाई को लेकर चिंता साफ नजर आई।
रावत का कहना है कि वह नहीं चाहते कि उनके नाम या उनसे जुड़े किसी विवाद की वजह से कांग्रेस द्वारा भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान पर सवाल उठे। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल यह उनकी इच्छा है और उन्होंने पार्टी को अपना औपचारिक इस्तीफा नहीं सौंपा है।
ED की कार्रवाई के बाद आया बयान
रावत के करीबी सहयोगी के ठिकाने पर ED की कार्रवाई के एक दिन बाद उनका यह बयान सामने आया है। ऐसे में उनके बयान को मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रम से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, रावत ने अपनी पोस्ट में अपने पद छोड़ने की इच्छा के पीछे पार्टी की छवि और भ्रष्टाचार विरोधी संघर्ष को प्रमुख वजह बताया है।
उत्तराखंड कांग्रेस में बढ़ी हलचल
हरीश रावत उत्तराखंड कांग्रेस के प्रमुख और अनुभवी नेताओं में गिने जाते हैं। ऐसे समय में दो पदों से हटने की इच्छा जताना पार्टी के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। अब देखना होगा कि कांग्रेस नेतृत्व उनके इस रुख पर क्या फैसला लेता है और क्या रावत के इस्तीफे की इच्छा को स्वीकार किया जाता है।






