स्टेट डेस्क, नीतीश कुमार।
नई दिल्ली। पंजाब सरकार ने पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को आपराधिक मामला दर्ज करने और मुख्यमंत्री भगवंत मान के कार्यालय से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच करने का निर्देश दिया गया था।
SLP के जरिए आदेश को दी चुनौती
राज्य सरकार ने सोमवार को पारित उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दाखिल की है। पंजाब सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत के समक्ष मामले की जल्द सुनवाई की मांग रखी।
बुधवार या गुरुवार को हो सकती है सुनवाई
विकास सिंह ने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार के आरोपों की सीबीआई जांच का उच्च न्यायालय का निर्देश राजनीति से प्रेरित है और संघीय ढांचे का उल्लंघन करता है।
मुख्य न्यायाधीश ने मंगलवार को मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने से इनकार कर दिया। हालांकि, उन्होंने कहा कि मामले पर बुधवार या गुरुवार को विचार किया जा सकता है।
पीएमएलए की धारा 66(2) का दिया हवाला
पंजाब सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलील दी कि धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 66(2) के तहत प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से साझा की गई जानकारी के आधार पर जांच का निर्देश देकर उच्च न्यायालय से चूक हुई है।
उन्होंने कहा कि पुलिस की कार्रवाई तभी उचित हो सकती है, जब प्राप्त जानकारी से कोई संज्ञेय अपराध सामने आता हो। इस दौरान उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक विजय मदनलाल चौधरी फैसले का भी हवाला दिया।







