नेशनल डेस्क, श्रेया पाण्डेय |
नई दिल्ली: उत्तराखंड स्थित श्री हेमकुंड साहिब की तीर्थयात्रा पर जाने वाले 92 से अधिक पाकिस्तानी सिख तीर्थयात्रियों को शुक्रवार को पाकिस्तान के आव्रजन (इमिग्रेशन) अधिकारियों ने भारत जाने वाली परोक्ष उड़ान में सवार होने से रोक दिया। महिलाओं और बच्चों सहित इन तीर्थयात्रियों को भारतीय वीजा मिल चुका था, इसके बावजूद उन्हें फैसलाबाद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर, जो लाहौर से लगभग 150 किलोमीटर दूर स्थित है, यात्रा करने से वंचित कर दिया गया। कुछ रिपोर्टों के अनुसार यह संख्या 100 से अधिक थी और कुल 104 सिख श्रद्धालुओं को भारतीय वीजा प्रदान किए गए थे।
संघीय जांच एजेंसी (FIA) के एक अधिकारी ने पीटीआई को बताया कि ये तीर्थयात्री फैसलाबाद से दुबई होते हुए नई दिल्ली जाने वाली एक खाड़ी देश की विमान सेवा में सवार होने वाले थे। हालांकि आव्रजन अधिकारियों ने उन्हें यह कहकर रोक दिया कि उनके पास वापसी टिकट (रिटर्न टिकट) और संघीय सरकार से जारी अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) नहीं है। भारत और पाकिस्तान के बीच वर्तमान में कोई सीधी हवाई, रेल या सड़क संपर्क सेवा उपलब्ध नहीं है, जिसके चलते तीर्थयात्रियों को तीसरे देश के रास्ते यात्रा करनी पड़ रही थी।
एक अधिकारी ने बताया कि आव्रजन अधिकारियों ने तीर्थयात्रियों से कहा कि वे संघीय सरकार से एनओसी और वापसी टिकट प्रस्तुत करें, उसके बाद ही उन्हें आगे की यात्रा जारी रखने की अनुमति दी जाएगी। अधिकारी ने यह भी सुझाव दिया कि इन तीर्थयात्रियों को अपनी यात्रा के लिए पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (PSGPC) से समन्वय करना चाहिए था और भारत में प्रवेश के लिए वाघा सीमा को प्राथमिकता देनी चाहिए थी। उन्होंने संभावना जताई कि इन तीर्थयात्रियों को वाघा सीमा के रास्ते तीर्थयात्रा पर जाने की अनुमति मिल सकती है।
इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसमें फैसलाबाद हवाई अड्डे पर मौजूद एक सिख श्रद्धालु को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि आव्रजन अधिकारियों ने उन्हें भारत जाने से रोक दिया है। वीडियो में यह भी सुना गया कि पिछले चार घंटों से तीर्थयात्री हवाई अड्डे पर फंसे हुए हैं और उन्होंने प्रशासन से हस्तक्षेप कर मदद करने की अपील की। अन्य सिख परिवार भी हवाई अड्डे परिसर में इंतजार करते देखे गए।
यह घटना भारत-पाकिस्तान के बीच धार्मिक स्थलों की यात्रा से जुड़े द्विपक्षीय प्रोटोकॉल और नौकरशाही बाधाओं के बीच के तनाव को एक बार फिर उजागर करती है, जो अक्सर श्रद्धालुओं के लिए असुविधा का कारण बनती रही हैं।







