विदेश डेस्क, आर्या कुमारी।
वॉशिंगटन, होर्मुज जलडमरूमध्य और उससे जुड़े समुद्री इलाकों में बढ़ते तनाव के बीच बड़ी संख्या में वाणिज्यिक जहाजों ने अपने निर्धारित मार्ग बदल दिए हैं। ताजा रिपोर्ट के अनुसार अब तक 108 व्यापारिक जहाजों को सुरक्षा कारणों से वैकल्पिक रास्तों की ओर मोड़ा जा चुका है। यह बदलाव उस समुद्री नाकेबंदी अभियान के बाद देखने को मिला है, जिसमें ईरान से जुड़े बंदरगाहों और समुद्री गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि क्षेत्र में जारी सैन्य गतिविधियों और बढ़ती अनिश्चितता के कारण अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों के बीच चिंता लगातार बढ़ रही है। कई जहाजों को संभावित खतरे से बचाने के लिए उनके मार्गों में परिवर्तन किया गया, जिससे वैश्विक समुद्री व्यापार और तेल आपूर्ति पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। समुद्री मार्गों में बदलाव के कारण यात्रा की अवधि और परिवहन लागत दोनों बढ़ सकती हैं।
जानकारी के अनुसार यह समुद्री अभियान अभी भी सक्रिय है और संबंधित इलाकों में निगरानी तथा सैन्य उपस्थिति लगातार बनाए रखी गई है। हालांकि दूसरी ओर अमेरिका और ईरान के बीच राजनयिक स्तर पर बातचीत और तनाव कम करने के प्रयास भी जारी हैं, लेकिन जमीन और समुद्र दोनों स्तरों पर हालात अब भी पूरी तरह सामान्य नहीं माने जा रहे हैं।
यह पूरा घटनाक्रम उस समय शुरू हुआ जब हाल ही में दोनों देशों के बीच युद्धविराम को लेकर बयान सामने आए थे। इसके कुछ ही दिनों बाद समुद्री नाकेबंदी और निगरानी अभियान को तेज कर दिया गया। इसके बाद से दोनों पक्ष लगातार एक-दूसरे पर समझौते के उल्लंघन के आरोप लगाते रहे हैं, जिससे क्षेत्रीय तनाव और अधिक बढ़ गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल और अन्य जरूरी सामानों की आवाजाही होती है। ऐसे में यहां किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव वैश्विक बाजारों और ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर सीधा प्रभाव डाल सकता है। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी इस घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है।
रिपोर्ट के मुताबिक समुद्री सुरक्षा एजेंसियों और शिपिंग कंपनियों को लगातार सतर्क रहने की सलाह दी गई है। क्षेत्र में तैनात सैन्य बल हालात पर नजर रखे हुए हैं और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त सुरक्षा कदम उठाने की तैयारी भी की जा रही है। वहीं कूटनीतिक स्तर पर तनाव कम करने की कोशिशों के बावजूद समुद्री मार्गों पर अस्थिरता बनी हुई है।
माना जा रहा है कि यदि आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच तनाव कम नहीं हुआ तो जहाजों के मार्ग बदलने की संख्या और बढ़ सकती है। इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री परिवहन क्षेत्र पर व्यापक असर पड़ने की संभावना बनी हुई है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर होर्मुज क्षेत्र में विकसित हो रहे हालात पर टिकी हुई है।







