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होली 2026: आस्था, खगोल और परंपरा का अनोखा संगम

लोकल डेस्क, राजीव कु. भारती ।

होलिका दहन, चंद्रग्रहण और होलिकोत्सव को लेकर विशेष जानकारी जारी- आचार्य मनोज मिश्रा ने बताया शुभ मुहूर्त
फाल्गुन पूर्णिमा के अवसर पर वर्ष 2026 में होली पर्व विशेष धार्मिक और खगोलीय संयोग के साथ मनाया जाएगा। इस संबंध में धर्माचार्य आचार्य मनोज मिश्रा ने जानकारी देते हुए बताया कि इस वर्ष होलिका दहन, चंद्रग्रहण और होलिकोत्सव का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जो आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ माना जा रहा है।

आचार्य मिश्रा के अनुसार, 2 मार्च 2026, सोमवार को फाल्गुन पूर्णिमा के दिन होलिका दहन किया जाएगा। भद्रा काल समाप्त होने के बाद रात्रि लगभग 2 बजे के बाद होलिका दहन करना शास्त्रसम्मत और फलदायी रहेगा। इस दिन स्नान, दान और पूजा का विशेष महत्व रहेगा।

उन्होंने बताया कि 3 मार्च 2026 को सायं 6 बजे से रात्रि 6:47 बजे तक चंद्रग्रहण रहेगा। ग्रहण काल में जप, ध्यान और दान-पुण्य करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान कर पूजा-अर्चना करना लाभकारी माना गया है।

इसके पश्चात 4 मार्च 2026 को पूरे हर्षोल्लास के साथ होलिकोत्सव मनाया जाएगा। इस दिन लोग रंगों के माध्यम से प्रेम, भाईचारे और सौहार्द का संदेश देंगे।

आचार्य मनोज मिश्रा ने कहा कि होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है, जबकि होली समाज में आपसी प्रेम और एकता को मजबूत करने का पर्व है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से परंपराओं के अनुसार पर्व मनाने और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने की अपील की।

उन्होंने अंत में कहा कि इस पावन अवसर पर सभी लोग संयम, श्रद्धा और उल्लास के साथ पर्व मनाएं तथा समाज में सकारात्मकता का प्रसार करें।