विदेश डेस्क, आर्या कुमारी।
नई दिल्ली। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव लगातार गहराता जा रहा है। अमेरिकी सेना ने सोमवार देर रात ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर नए सिरे से मिसाइल और हवाई हमले किए। यह लगातार दसवीं रात है जब अमेरिकी सेना ने ईरानी ठिकानों को निशाना बनाया। बंदर अब्बास समेत कई इलाकों में जोरदार धमाकों की आवाजें सुनी गईं, जबकि होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों की आवाजाही लगभग पूरी तरह प्रभावित हो गई है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में बताया कि राष्ट्रपति के आदेश के बाद पूर्वी अमेरिकी समयानुसार शाम चार बजे ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान का नया चरण शुरू किया गया। अमेरिका का कहना है कि इन हमलों का मकसद ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना है, जिनका इस्तेमाल होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों और समुद्री गतिविधियों को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है। अमेरिकी प्रशासन का दावा है कि यह कार्रवाई क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा बनाए रखने के उद्देश्य से की जा रही है।
इन हमलों की पृष्ठभूमि में हाल के दिनों में एक अमेरिकी सैनिक की मौत और ईरान की ओर से अमेरिका के सहयोगी देशों कुवैत, जॉर्डन और बहरीन पर किए गए हमले बताए जा रहे हैं। बहरीन में अमेरिकी नौसेना का पांचवां बेड़ा भी तैनात है। अमेरिका का आरोप है कि ईरान की आक्रामक गतिविधियों के कारण पूरे क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है, जिसके जवाब में सैन्य कार्रवाई तेज की गई है।
लगातार जारी संघर्ष का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही बाधित होने से कच्चे तेल की कीमतों में करीब तीन प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई और अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत 90 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। वहीं अमेरिका में भी ईंधन महंगा हो गया है और पेट्रोल की कीमत लगभग चार डॉलर प्रति गैलन तक पहुंचने की खबर है। बढ़ती महंगाई और ऊर्जा संकट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर भी राजनीतिक दबाव बढ़ा दिया है, खासकर आगामी मध्यावधि चुनावों को देखते हुए।
तनाव के बीच कूटनीतिक स्तर पर भी हलचल तेज हुई है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक दोनों देशों की ओर से बातचीत दोबारा शुरू करने के संकेत मिले हैं। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि तनाव कम करने को लेकर कुछ प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, हालांकि उन्होंने इन प्रस्तावों का विस्तृत विवरण साझा नहीं किया। दूसरी ओर ट्रंप प्रशासन ने भी संकेत दिया है कि यदि सकारात्मक माहौल बनता है तो वह वार्ता के लिए तैयार है।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा कि यदि बातचीत का रास्ता खुलता है तो अमेरिका उसका स्वागत करेगा, लेकिन इसके लिए ईरान को भी सकारात्मक और जिम्मेदार रवैया अपनाना होगा। हालांकि अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि तत्काल किसी समझौते की संभावना कम है। इसी बीच पश्चिम एशिया में बड़ी संख्या में लड़ाकू विमान और अतिरिक्त सैन्य संसाधन भेजे जा रहे हैं, जिससे संकेत मिल रहे हैं कि अमेरिका अपनी सैन्य कार्रवाई और तेज कर सकता है। बढ़ते खतरे को देखते हुए भारत सहित कई देशों ने अपने नागरिकों को पश्चिम एशिया छोड़ने या सतर्क रहने की सलाह जारी की है।






