विदेश डेस्क, आर्या कुमारी।
नयी दिल्ली : भारत और ब्रिटेन के बीच लंबे समय से प्रस्तावित व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (सीईटीए) तथा सामाजिक सुरक्षा से संबंधित दोहरा अंशदान समझौता आगामी 15 जुलाई 2026 से लागू हो जाएगा। इस समझौते के लागू होने के साथ ही दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है, जबकि व्यापार, निवेश और रोजगार के क्षेत्र में भी इसके सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने फ्रांस के एवियन में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के साथ हुई द्विपक्षीय बैठक के बाद इस महत्वपूर्ण घोषणा की। दोनों नेताओं ने समझौते को तय समयसीमा के भीतर लागू करने पर सहमति व्यक्त की और इसे भारत-ब्रिटेन साझेदारी के इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर बैठक की तस्वीरें साझा करते हुए कहा कि दोनों देशों ने 15 जुलाई 2026 से इस समझौते को प्रभावी बनाने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि यह समझौता दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को नई दिशा देगा और व्यापारिक संबंधों को और अधिक मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
समझौते के तहत भारतीय उत्पादों को ब्रिटेन के बाजार में बड़ी राहत मिलने जा रही है। इसके लागू होने के बाद भारत से ब्रिटेन को होने वाले लगभग 99 प्रतिशत निर्यात पर शून्य शुल्क (जीरो टैरिफ) लागू होगा। इससे भारतीय उद्योगों, विशेषकर वस्त्र, चमड़ा, रत्न एवं आभूषण, कृषि उत्पाद, समुद्री उत्पाद और इंजीनियरिंग वस्तुओं के निर्यात को उल्लेखनीय बढ़ावा मिलने की संभावना है।
वहीं सामाजिक सुरक्षा से जुड़े दोहरा अंशदान समझौते के लागू होने से ब्रिटेन में कार्यरत भारतीय पेशेवरों और कर्मचारियों को भी राहत मिलेगी। इस व्यवस्था के तहत उन्हें एक ही अवधि के लिए दोनों देशों में सामाजिक सुरक्षा योगदान जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी, जिससे उनकी आय पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ कम होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता दोनों देशों के बीच व्यापारिक गतिविधियों को गति देने के साथ-साथ निवेश के नए अवसर भी पैदा करेगा। इससे भारतीय कंपनियों की ब्रिटेन तक पहुंच आसान होगी, जबकि ब्रिटिश निवेशकों के लिए भी भारत में कारोबार का माहौल अधिक अनुकूल बनने की संभावना है।
भारत और ब्रिटेन के बीच यह समझौता ऐसे समय लागू होने जा रहा है जब दोनों देश रणनीतिक, आर्थिक और तकनीकी सहयोग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के प्रयास कर रहे हैं। 15 जुलाई से इसके प्रभावी होने के साथ ही द्विपक्षीय व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि तथा दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग के नए अध्याय खुलने की उम्मीद जताई जा रही है।







