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15 दिन का अनशन खत्म: वांगचुक ने की शांति की अपील

नेशनल डेस्क, आर्या कुमारी |

लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने और छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर लेह में जारी प्रदर्शन के बीच, जहाँ छात्रों और प्रदर्शनकारियों व पुलिस के बीच झड़पें हुईं, उसी पृष्ठभूमि पर सोनम वांगचुक ने अपनी 15 दिन की भूख हड़ताल समाप्त कर दी और लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है।

लेह में प्रदर्शन तीव्र हो रहे हैं, प्रदर्शनकारी छात्र और पुलिस आमने-सामने हैं। वांगचुक, जो छठी अनुसूची और राज्य दर्जे की मांग को लेकर पिछले 15 दिनों से अनशन पर थे, ने अब अपना अनशन छोड़ दिया है। विरोध की शुरुआत के तुरंत बाद उन्होंने लोगों से संयम बरतने का आग्रह किया और हिंसा बंद करने की अपील की, क्योंकि हिंसा मुख्य उद्देश्य को नुकसान पहुंचा रही है। सोनम वांगचुक ने कहा, "आज, हमारे अनशन के 15वें दिन, मुझे यह बताते हुए बहुत दुख हो रहा है कि लेह शहर में व्यापक हिंसा और तोड़फोड़ हुई। कई कार्यालयों और पुलिस वाहनों में आग लगा दी गई। कल, यहाँ 35 दिनों से अनशन कर रहे दो लोगों को बहुत गंभीर हालत में अस्पताल ले जाना पड़ा। इससे व्यापक आक्रोश फैल गया और आज पूरे लेह में पूर्ण बंद की घोषणा कर दी गई।

हजारों युवा बाहर निकल आए। कुछ लोग सोचते हैं कि वे हमारे समर्थक हैं। पूरा लेह हमारा समर्थक है। लेकिन यह जेनरेशन Z की क्रांति थी। वे पिछले 5 सालों से बेरोज़गार हैं  उन्हें नौकरियों से वंचित किया जा रहा है। मैंने हमेशा कहा है कि यही सामाजिक अशांति का नुस्खा है: युवाओं को बेरोज़गार रखना और उनके लोकतांत्रिक अधिकारों को छीनना। आज यहाँ कोई लोकतांत्रिक मंच नहीं है। छठी अनुसूची, जिसकी घोषणा और वादा किया गया था, उस पर ध्यान नहीं दिया गया।

हालाँकि, अभी के लिए, मैं लद्दाख की युवा पीढ़ी से अपील करता हूँ कि वे हिंसा के इस रास्ते पर न चलें, क्योंकि यह मेरे पाँच साल की मेहनत पर पानी फेर देगा। मैं इतने सालों से अनशन कर रहा हूँ, शांतिपूर्वक मार्च निकाल रहा हूँ, और अगर हिंसा का रास्ता अपनाया जाए तो यह हमारा मार्ग नहीं होगा। मैं युवा पीढ़ी से अनुरोध करता हूँ कि वे शांति के रास्ते सरकार तक पहुँचें। मैं चाहता हूँ कि सरकार शांति का संदेश सुने।

जब वे शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों और मार्चों की अनदेखी करते हैं, तो ऐसे हालात पैदा होते हैं। मैं सरकार से लद्दाख के बारे में संवेदनशील होने और युवा पीढ़ी से शांति के रास्ते पर चलने का आग्रह करूँगा। यह (हिंसा का) रास्ता मेरा रास्ता नहीं है। यह उनके गुस्से का नतीजा है। लेकिन यह गुस्सा निकालने का समय नहीं है। यह सरकार के साथ शांति से बातचीत करने का समय है।"

घटना के बाद प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है — लेह के डीएम ने बीएनएस की धारा 163 लागू कर दी है। इसके तहत पाँच या उससे अधिक लोगों के बिना अनुमति जुटने, जुलूस निकालने और सार्वजनिक शांति भंग करने वाले बयानों पर रोक लगाई गई है।