विदेश डेस्क, आर्या कुमारी |
रोम : तुर्की में प्रस्तावित नाटो शिखर सम्मेलन से पहले वर्ष 2027 के लिए यूक्रेन को दिए जाने वाले सैन्य सहायता पैकेज पर सदस्य देशों के बीच आम सहमति नहीं बन सकी है। इस मुद्दे पर इटली के विरोध के चलते गठबंधन अब तक किसी साझा वित्तीय प्रतिबद्धता पर नहीं पहुंच पाया है।
सूत्रों के अनुसार, इटली ने प्रस्तावित सैन्य सहायता पैकेज का समर्थन करने से इनकार कर दिया है। उसका कहना है कि यूक्रेन को सहायता उपलब्ध कराने और रक्षा व्यय का बोझ सभी यूरोपीय सहयोगी देशों के बीच अधिक संतुलित और समान रूप से साझा किया जाना चाहिए। इसी कारण प्रस्तावित पैकेज को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया फिलहाल अटक गई है।
बताया जा रहा है कि इटली के विरोध के चलते नाटो वर्ष 2027 के लिए कम से कम उतनी सैन्य सहायता देने की प्रतिबद्धता भी व्यक्त नहीं कर सका है, जितनी वर्ष 2026 में यूक्रेन को उपलब्ध कराई गई थी। वर्ष 2026 में यूक्रेन को लगभग 80 अरब डॉलर की सैन्य सहायता प्रदान की गई थी, लेकिन अगले वर्ष के लिए ऐसी किसी न्यूनतम राशि पर सहमति नहीं बन सकी है।
इस बीच, अमेरिका ने भी मसौदा दस्तावेज में यूक्रेन और यूरोप की सुरक्षा से संबंधित भाषा में बदलाव का समर्थन किया है। अमेरिका की सहमति के बाद उस शब्दावली को हटाया गया है, जिसमें यूक्रेन और यूरोप की सुरक्षा के बीच 'अविभाज्य संबंध' होने की बात कही गई थी।
संशोधित मसौदे में अब यह उल्लेख किया गया है कि "यूक्रेन ट्रांस-अटलांटिक सुरक्षा में योगदान देता है।" इस बदलाव को नाटो की आधिकारिक भाषा में अपेक्षाकृत नरम रुख के रूप में देखा जा रहा है, जिससे सदस्य देशों के बीच विभिन्न मुद्दों पर मतभेद भी सामने आए हैं।
उधर, रूस लगातार पश्चिमी देशों द्वारा यूक्रेन को हथियारों की आपूर्ति का विरोध करता रहा है। रूस का कहना है कि इस तरह की सैन्य सहायता से संघर्ष के समाधान की संभावनाएं कमजोर होती हैं और नाटो सदस्य देश प्रत्यक्ष रूप से युद्ध में शामिल होते जा रहे हैं। ऐसे में आगामी नाटो शिखर सम्मेलन में यूक्रेन को लेकर सदस्य देशों के रुख पर विशेष नजर रहेगी।







