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22-30% एथनॉल मिश्रित पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी छूट

नेशनल डेस्क, मुस्कान कुमारी।

  • सरकार का बायोफ्यूल को बढ़ावा, E20 के बाद नई राह....

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने बायोफ्यूल को लोकप्रिय बनाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब 22 से 30 प्रतिशत तक एथनॉल मिश्रित पेट्रोल पर सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी नहीं लगेगी। इस छूट में 22%, 25%, 27% और 30% वाले ब्लेंड शामिल हैं।

सरकार की अधिसूचना बुधवार रात जारी हुई। ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) ने 19 मई को इन नए ईंधन स्टैंडर्ड को अधिसूचित किया था। फिलहाल ये ब्लेंड बाजार में उपलब्ध नहीं हैं।

यह कदम 20 प्रतिशत एथनॉल ब्लेंडिंग (E20) के सफल लक्ष्य हासिल करने के बाद उठाया गया है। BIS के अनुसार, नए स्टैंडर्ड स्वच्छ परिवहन, ऊर्जा सुरक्षा, कच्चे तेल के आयात में कमी और कृषि क्षेत्र को समर्थन देने के उद्देश्य से तैयार किए गए हैं।

एथनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम को नई गति

सरकार ईथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम के तहत लगातार प्रयास कर रही है। E20 पहले से ही उपलब्ध है। अब इससे ज्यादा एथनॉल वाले पेट्रोल को ड्यूटी फ्री करने से ऑयल कंपनियों और उपभोक्ताओं दोनों को फायदा होने की उम्मीद है। इससे ईंधन सस्ता हो सकता है और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।

कुछ दिन पहले ही 5 जून को सरकार ने E85 ईंधन लॉन्च किया था। यह 85 प्रतिशत एथनॉल और 15 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण है। E85, E20 की तुलना में करीब ₹20 प्रति लीटर सस्ता है। इससे उपभोक्ताओं को सीधा फायदा हो रहा है।

पर्यावरण और अर्थव्यवस्था पर असर

उच्च एथनॉल ब्लेंडिंग से वाहनों का प्रदूषण कम होगा। साथ ही पेट्रोलियम उत्पादों पर निर्भरता घटेगी। भारत अभी भी बड़ी मात्रा में कच्चा तेल आयात करता है। इन नए ब्लेंड से विदेशी मुद्रा की बचत संभव है।

कृषि क्षेत्र को भी बल मिलेगा क्योंकि एथनॉल मुख्य रूप से गन्ना, मक्का और अन्य फसलों से बनता है। इससे किसानों को अतिरिक्त आय का स्रोत मिलेगा और चीनी मिलों की व्यवहार्यता बढ़ेगी।

BIS मानकों का महत्व

BIS ने इन नए ब्लेंड के लिए विस्तृत मानक जारी किए हैं। इनमें ईंधन की गुणवत्ता, प्रदर्शन और सुरक्षा के सभी पहलुओं को ध्यान में रखा गया है। अधिसूचना के बाद ऑयल मार्केटिंग कंपनियां इन ब्लेंड को तैयार करने की दिशा में काम शुरू कर सकेंगी।

सरकार का लक्ष्य भविष्य में और अधिक एथनॉल ब्लेंडिंग को बढ़ावा देना है। इससे न केवल पर्यावरण संरक्षण होगा बल्कि आत्मनिर्भर भारत अभियान को भी मजबूती मिलेगी।