इंटरनेशनल डेस्क, मुस्कान सिंह।
ब्रुसेल्स : यूरोप में आने वाले तीन वर्षों के दौरान एचआईवी और तपेदिक (टीबी) के मामलों में चिंताजनक वृद्धि देखने को मिल सकती है। यूरोपीय रोग निवारण एवं नियंत्रण केंद्र (ईसीडीसी) ने चेतावनी दी है कि इस अवधि में लगभग 80,000 नए एचआईवी संक्रमण के मामले सामने आ सकते हैं, जबकि टीबी के कारण 9000 से अधिक लोगों की मौत होने की आशंका है। इस अनुमान ने यूरोप की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।
ईसीडीसी की निदेशक पामेला रेंडी-वैगनर ने कहा कि यदि संक्रमण की रोकथाम, समय पर जांच और उपचार संबंधी प्रयासों को और मजबूत नहीं किया गया, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। उन्होंने स्वास्थ्य एजेंसियों और सदस्य देशों से इस दिशा में समन्वित और प्रभावी कदम उठाने की अपील की है।
गत 21 मई को जारी ईसीडीसी की एक रिपोर्ट में बताया गया था कि वर्ष 2024 में यूरोप में यौन संचारित संक्रमणों (एसटीआई) की दर पिछले एक दशक में सबसे अधिक दर्ज की गई। इनमें सिफलिस और गोनोरिया जैसे संक्रमणों के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता की कमी, नियमित जांच में गिरावट और असुरक्षित यौन व्यवहार इसके प्रमुख कारण हो सकते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, यूरोपीय संघ के सदस्य देशों के अलावा आइसलैंड, लिकटेंस्टीन और नॉर्वे में भी संक्रमण संबंधी चुनौतियां बढ़ रही हैं। इन देशों में वर्तमान समय में करीब आठ लाख लोग एचआईवी के साथ जीवन व्यतीत कर रहे हैं। वहीं, टीबी और अन्य संक्रामक रोगों के कारण हर वर्ष लगभग 59 हजार लोगों की मौत होने का अनुमान है।
स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि एचआईवी और टीबी जैसी बीमारियों की रोकथाम के लिए शुरुआती पहचान, समय पर उपचार और जनजागरूकता बेहद जरूरी है। साथ ही, जोखिम वाले समूहों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने की आवश्यकता भी बताई गई है।
यूरोप में संक्रमण के बढ़ते मामलों को लेकर स्वास्थ्य क्षेत्र में चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में स्वास्थ्य सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है और हजारों लोगों का जीवन प्रभावित हो सकता है। ऐसे में संक्रमण नियंत्रण और रोकथाम की रणनीतियों को और अधिक मजबूत बनाने पर जोर दिया जा रहा है।







