नेशनल डेस्क, आर्या कुमारी।
नई दिल्ली: यातायात नियम तोड़ने वालों के खिलाफ केंद्र सरकार ने सख्ती बढ़ा दी है। अब अगर किसी चालक का एक साल में पांच या उससे अधिक बार ई-चालान कटता है, तो उसका ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित किया जा सकता है। यह प्रावधान मोटर वाहन नियमों में हालिया संशोधन के जरिए जोड़ा गया है, जिसका उद्देश्य आदतन नियम तोड़ने वाले चालकों पर लगाम लगाना है।
संशोधित नियमों के अनुसार, एक वर्ष की अवधि में मोटर वाहन अधिनियम या उससे जुड़े नियमों के पांच या अधिक उल्लंघन करने वाले चालक को ड्राइविंग लाइसेंस के लिए अयोग्य माना जा सकता है। हालांकि, लाइसेंस निलंबन से पहले संबंधित लाइसेंसिंग प्राधिकरण चालक को अपना पक्ष रखने का मौका देगा।
इन नियमों में करीब 24 तरह के ट्रैफिक उल्लंघन शामिल किए गए हैं। इनमें तेज रफ्तार से वाहन चलाना, ओवरलोडिंग, सार्वजनिक स्थान पर गलत पार्किंग, हेलमेट न पहनना, सीट बेल्ट या ट्रैफिक सिग्नल तोड़ना, वाहन चोरी से जुड़ा मामला या सवारी से झगड़ा जैसे अपराध शामिल हैं। इनमे से किसी भी पांच नियमों का उल्लंघन एक साल के भीतर होने पर लाइसेंस सस्पेंड हो सकता है।
ड्राइविंग लाइसेंस को निलंबित या रद्द करने का अधिकार क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) या जिला परिवहन कार्यालय (DTO) के पास होगा। नियमों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि हर साल की गणना अलग-अलग होगी, यानी पिछले वर्ष के चालान को अगले वर्ष की गिनती में शामिल नहीं किया जाएगा। यह व्यवस्था एक जनवरी से लागू मानी जाएगी।
नए प्रावधानों के तहत अब केवल ई-चालान के आधार पर भी ड्राइविंग लाइसेंस रद्द किया जा सकता है। पहले चालान के साथ गवाह जरूरी होता था और क्रमशः निलंबन की अवधि बढ़ाई जाती थी, लेकिन अब प्रक्रिया को और कड़ा बना दिया गया है।
इसके साथ ही सरकार ने टोल टैक्स को लेकर भी सख्त नियम लागू किए हैं। यदि किसी वाहन पर टोल बकाया है, तो उससे जुड़े जरूरी काम जैसे एनओसी, फिटनेस सर्टिफिकेट या परमिट जारी नहीं किए जाएंगे। केंद्रीय मोटर वाहन (दूसरा संशोधन) नियम, 2026 के तहत यह फैसला नेशनल हाईवे पर टोल वसूली को मजबूत करने और टोल चोरी रोकने के लिए लिया गया है।







