स्टेट डेस्क, रानी कुमारी।
मध्य प्रदेश। स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) टाइप-2 जैसी दुर्लभ और गंभीर बीमारी से पीड़ित इंदौर की तीन वर्षीय अनिका शर्मा का इलाज कागजी प्रक्रिया में फंस गया है। अनिका की जान बचाने के लिए अमेरिका से मंगाया जाने वाला ज़ोलजेन्स्मा इंजेक्शन करीब 9.5 करोड़ रुपये का है, लेकिन दिल्ली एम्स में जरूरी दस्तावेज और इनवॉइस जारी नहीं होने के कारण दवा की खरीद और इलाज शुरू नहीं हो पा रहा है। मामले को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने केंद्र सरकार, राज्य सरकार और AIIMS दिल्ली पर सख्त रुख अपनाया है।
द्वारकापुरी क्षेत्र की रहने वाली अनिका स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) टाइप-2 से पीड़ित है। यह एक दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी है, जिसमें शरीर की मांसपेशियां धीरे-धीरे कमजोर होती जाती हैं। इससे बच्चे को बैठने, खड़े होने, चलने और यहां तक कि सांस लेने में भी परेशानी होने लगती है। डॉक्टरों के अनुसार, इस बीमारी का सबसे प्रभावी इलाज ज़ोलजेन्स्मा इंजेक्शन है, जिसे अमेरिका से मंगाया जाता है और इसकी कीमत लगभग 9.5 करोड़ रुपये है।
डॉक्टरों ने बताया है कि इस इंजेक्शन के लिए बच्चे का वजन 13.5 किलोग्राम से कम होना जरूरी है। फिलहाल अनिका का वजन करीब 10.5 से 11 किलोग्राम है, लेकिन समय बीतने के साथ उसका वजन बढ़ रहा है, जिससे इलाज की समय-सीमा तेजी से कम होती जा रही है।
अनिका के माता-पिता सरिता शर्मा और प्रवीण शर्मा पिछले कई महीनों से बेटी के इलाज के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। क्राउडफंडिंग अभियान, सोशल मीडिया अपील, विभिन्न शहरों में सहायता अभियान और जनसहयोग के माध्यम से अब तक करीब 7.5 करोड़ रुपये जुटाए जा चुके हैं। इस अभियान में ट्रू होप फाउंडेशन, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और हजारों लोगों ने आर्थिक सहयोग दिया है। इसके बावजूद AIIMS में आवश्यक इनवॉइस और दस्तावेज जारी नहीं होने के कारण दवा की खरीद प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है।
मामला हाईकोर्ट पहुंचने पर जस्टिस सुबोध अभ्यंकर की एकल पीठ ने केंद्र सरकार, राज्य सरकार और AIIMS दिल्ली को नोटिस जारी किया। सुनवाई के दौरान अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि "क्या यह बच्ची प्रदेश की लाड़ली बहना नहीं है?" कोर्ट ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल को AIIMS से तत्काल संपर्क कर स्थिति स्पष्ट करने और जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई को होगी।






