नेशनल डेस्क, आर्या कुमारी।
नई दिल्ली। सार्वजनिक परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं को लेकर देशभर में हुए छात्र प्रदर्शनों को लेकर संसद में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सहयोगी पार्टी सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा (एसकेएम) ने छात्रों का समर्थन किया। लोकसभा में एंटी पेपर लीक विधेयक पर चर्चा के दौरान एसकेएम सांसद इंद्र हांग सुब्बा ने कहा कि युवाओं के विरोध प्रदर्शन को नकारात्मक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार यह व्यवस्था, सरकार और जनप्रतिनिधियों के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि देश की परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और मजबूत बनाने की जरूरत है।
लोकसभा में चर्चा के दौरान इंद्र हांग सुब्बा ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में छात्रों ने जिस तरह अपनी नाराजगी सड़कों पर उतरकर जताई है, वह केवल विरोध नहीं बल्कि परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि किसी भी सरकार के लिए ऐसे प्रदर्शन चेतावनी की तरह हैं और इन्हें गंभीरता से लेते हुए परीक्षा प्रणाली में मौजूद कमियों को दूर करने की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए। उनका कहना था कि युवाओं का विश्वास बनाए रखना सरकार और संस्थानों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
सुब्बा ने एंटी पेपर लीक विधेयक का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार का उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं में होने वाली गड़बड़ियों पर सख्ती से रोक लगाना है। उन्होंने बताया कि विधेयक में दोषियों के लिए कठोर सजा, न्यूनतम कारावास, अधिक जुर्माना और मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट जैसी व्यवस्थाओं का प्रावधान किया गया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इन प्रावधानों से परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता बढ़ेगी और अभ्यर्थियों का भरोसा मजबूत होगा।
एसकेएम सांसद ने कहा कि नीट-यूजी पेपर लीक के बाद देशभर में हुए छात्र आंदोलनों ने यह स्पष्ट कर दिया कि परीक्षाओं की निष्पक्षता को लेकर युवाओं में गंभीर चिंता है। उन्होंने कहा कि कई राज्यों के छात्रों ने परीक्षा में धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और परीक्षा संचालन में अधिक जवाबदेही की मांग की है। उनके अनुसार यह केवल एक परीक्षा का मुद्दा नहीं बल्कि लाखों युवाओं के भविष्य और उनके विश्वास से जुड़ा विषय है।
इंद्र हांग सुब्बा ने कहा कि पहले जहां नकल और पेपर लीक की घटनाएं छिटपुट रूप से सामने आती थीं, वहीं अब यह संगठित अपराध का रूप ले चुकी हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में बड़े आर्थिक लेन-देन और संगठित नेटवर्क की भूमिका सामने आ रही है, जिससे ईमानदारी से तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों को सबसे अधिक नुकसान उठाना पड़ता है। उनका कहना था कि आर्थिक रूप से सक्षम उम्मीदवार अनुचित साधनों का लाभ उठा लेते हैं, जबकि सीमित संसाधनों वाले मेहनती छात्र पीछे छूट जाते हैं।
सांसद ने कहा कि जब पेपर लीक या अन्य अनुचित तरीकों से कोई उम्मीदवार बेहतर परिणाम हासिल कर लेता है और मेहनत करने वाला छात्र अवसर से वंचित रह जाता है, तो यह केवल परीक्षा प्रणाली की विफलता नहीं बल्कि युवाओं के भविष्य के साथ अन्याय भी है। उन्होंने ऐसे मामलों की समयबद्ध जांच की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि लंबी जांच प्रक्रिया अक्सर न्याय मिलने में देरी का कारण बनती है। उनके अनुसार परीक्षा से जुड़े अपराधों में त्वरित कार्रवाई और समयसीमा के भीतर जांच पूरी करना ही व्यवस्था में विश्वास बहाल करने का सबसे प्रभावी तरीका होगा।







