नेशनल डेस्क, श्रेयांश पराशर l
नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए नामांकन प्रक्रिया सोमवार को पार्टी मुख्यालय में शुरू हुई, जिसमें कार्यवाहक अध्यक्ष नितिन नवीन का अध्यक्ष बनना लगभग तय माना जा रहा है। निर्धारित समय के अनुसार अपराह्न दो बजे से नामांकन पत्र दाखिल किए गए, जिसके लिए पार्टी मुख्यालय में वरिष्ठ नेताओं, मुख्यमंत्रियों और केंद्रीय मंत्रियों का जमावड़ा देखने को मिला।
नामांकन अवधि की शुरुआत में पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा, पूर्व अध्यक्ष सर्वेश्वर राजनाथ सिंह, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और वरिष्ठ नेता नितिन गडकरी ने अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ मिलकर नितिन नवीन के नाम का प्रस्ताव पत्र निर्वाचन अधिकारी को सौंपा। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू, धर्मेंद्र प्रधान, भूपेंद्र यादव सहित कई अन्य वरिष्ठ भाजपा नेता भी मौजूद रहे। इसके साथ ही भाजपा की विभिन्न प्रदेश इकाइयों की ओर से भी नितिन नवीन के समर्थन में नामांकन अनुमोदन पत्र प्रस्तुत किए गए।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए नितिन नवीन के अलावा किसी अन्य प्रत्याशी के नामांकन की संभावना न के बराबर है। ऐसे में उन्हें निर्विरोध अध्यक्ष घोषित किए जाने की औपचारिकता मात्र शेष रह गई है। नामांकन पत्रों की जांच शाम चार से पांच बजे तक की जाएगी, जबकि नाम वापस लेने की अंतिम समय-सीमा शाम छह बजे तय की गई है। यदि एक से अधिक प्रत्याशी सामने आते हैं तो पार्टी के कार्यक्रम के अनुसार मंगलवार, 20 जनवरी को मतदान कराया जाएगा।
सूत्रों ने बताया कि निर्वाचन अधिकारी आज शाम छह बजे के बाद निर्विरोध निर्वाचित अध्यक्ष के नाम की घोषणा कर सकते हैं। इससे पहले नामांकन प्रक्रिया शुरू होने से पहले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव सहित कई वरिष्ठ नेता पार्टी मुख्यालय पहुंचे थे।
भाजपा नेतृत्व का मानना है कि नितिन नवीन के अध्यक्ष बनने से संगठन को नई ऊर्जा मिलेगी और आगामी चुनावी चुनौतियों के लिए पार्टी और अधिक सशक्त होगी। उनके अनुभव और संगठनात्मक समझ को देखते हुए पार्टी के भीतर व्यापक सहमति दिखाई दे रही है। इस पूरी प्रक्रिया को भाजपा के संगठनात्मक लोकतंत्र और अनुशासन का उदाहरण माना जा रहा है।







