नेशनल डेस्क, श्रेया पाण्डेय |
नई दिल्ली में ब्रिक्स (BRICS) राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की दो दिवसीय बैठक शुरू: अजीत डोभाल की अध्यक्षता में गैर-पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियों और आतंकवाद पर चर्चा
नई दिल्ली: भारत की राजधानी नई दिल्ली में आज से ब्रिक्स (BRICS) देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों (NSAs) और शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों की दो दिवसीय अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक शुरू हो गई है। वर्ष 2026 में ब्रिक्स की चौथी बार अध्यक्षता कर रहे भारत के लिए यह आयोजन कूटनीतिक और सामरिक दृष्टि से बेहद अहम है। इस उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल कर रहे हैं। इस शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए चीनी विदेश मंत्री वांग यी, रूस की सुरक्षा परिषद के सचिव सर्गेई शोइगु और ईरान सहित अन्य विस्तारित ब्रिक्स सदस्य देशों के शीर्ष सुरक्षा प्रतिनिधि नई दिल्ली पहुंचे हैं। वर्तमान में दुनिया भर में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) के गहराते संकट के बीच हो रही यह बैठक वैश्विक व्यवस्था को स्थिर करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। बैठक के दौरान विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों के बीच द्विपक्षीय वार्ताओं का दौर भी चलेगा, जिसमें विशेष रूप से भारत और चीन के बीच सीमा मुद्दों और द्विपक्षीय संबंधों को सुधारने पर चर्चा होने की पूरी संभावना है।
इस बार की द्विवार्षिक बैठक का मुख्य विषय (Theme) 'आज की दुनिया के सामने गैर-पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियां' रखा गया है। इसके अंतर्गत सभी सदस्य देश राष्ट्रीय सुरक्षा के बदलते स्वरूप, साइबर खतरों, डिजिटल बुनियादी ढांचे की सुरक्षा और उभरती हुई नई तकनीकों (जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डीपफेक) के कारण पैदा होने वाले नए एवं जटिल सुरक्षा खतरों पर विस्तार से विचार-विमर्श कर रहे हैं। इसके साथ ही, हाल ही में आयोजित हुए ब्रिक्स आतंकवाद-विरोधी संयुक्त कार्य समूह (Joint Working Group on Counter-Terrorism) और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकियों के सुरक्षित उपयोग से जुड़े कार्य समूहों के निष्कर्षों और प्रस्तावों की भी समीक्षा की जा रही है। आतंकवाद के खिलाफ एक साझा फ्रंट तैयार करना हमेशा से ब्रिक्स का एक मजबूत स्तंभ रहा है, और भारत इस मंच का उपयोग सीमा पार आतंकवाद के मुद्दे को प्रमुखता से उठाने के लिए कर रहा है।
ग्यारह देशों के इस शक्तिशाली समूह (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात) के विस्तारित होने के बाद यह पहली बड़ी सुरक्षा केंद्रित बैठक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'मानवता-प्रथम' और 'लचीलापन, नवाचार, सहयोग एवं स्थिरता' (Resilience, Innovation, Cooperation, and Sustainability) के दृष्टिकोण के मार्गदर्शन में भारत इस मंच को किसी 'पश्चिम-विरोधी' ब्लॉक के रूप में नहीं, बल्कि 'ग्लोबल साउथ' (विकासशील देशों) की आवाज के रूप में स्थापित करने का प्रयास कर रहा है। आतंकवाद के खात्मे, खाद्य व ऊर्जा सुरक्षा, और जलवायु परिवर्तन जैसी साझा वैश्विक समस्याओं पर सहमति बनाना इस बैठक का मुख्य उद्देश्य है, जो इस साल के अंत में भारत में ही होने वाले मुख्य ब्रिक्स राष्ट्राध्यक्षों के शिखर सम्मेलन का आधार तैयार करेगी।







