नेशनल डेस्क, नीतीश कुमार।
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले सप्ताह के छात्र प्रदर्शनों में गिरफ्तार या हिरासत में लिए गए ऐसे सभी छात्रों को रिहा करने का निर्देश दिया है, जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। अदालत ने केंद्र सरकार समेत सात राज्यों से भी जवाब मांगा है।
सरकारों से मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के साथ असम, बिहार, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और केरल सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
जांच के दिए संकेत
मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने कहा कि छात्र प्रदर्शन के दौरान छात्रों और पुलिसकर्मियों के घायल होने के आरोपों की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच जरूरी है। अदालत ने संकेत दिया कि इस मामले की जांच के लिए पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया जा सकता है।
छात्रों की जानकारी सार्वजनिक नहीं होगी
अदालत ने निर्देश दिया कि प्रदर्शन में शामिल छात्रों की व्यक्तिगत जानकारी और डिजिटल डेटा सुरक्षित रखा जाए। साथ ही फिलहाल उनकी पहचान सार्वजनिक नहीं की जाए। अदालत ने यह भी कहा कि जिन छात्रों का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, उनके खिलाफ केवल प्रदर्शन में शामिल होने के आधार पर कोई दंडात्मक कार्रवाई न की जाए।
सभी रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को घटनाओं से जुड़े सभी सीसीटीवी और ड्रोन फुटेज, कैमरा रिकॉर्डिंग, वायरलेस रिकॉर्ड तथा पीसीआर लॉग सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है।







