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CJP हिंसा: पुलिस परिवारों की SC में गुहार

नेशनल डेस्क, श्रेया पाण्डेय 

नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में हुए प्रदर्शनों के दौरान घायल हुए पुलिसकर्मियों के परिवार सुप्रीम कोर्ट पहुंचे हैं और उन्होंने हिंसा भड़काने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने घायल पुलिसकर्मियों के परिवारों की ओर से पेश हो रहे वकील को इस मामले की सुनवाई में शामिल होने की अनुमति दे दी है।

गौरतलब है कि CJP आंदोलन की शुरुआत जंतर-मंतर से हुई थी, जो नीट परीक्षा में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ छात्रों और युवाओं का विरोध प्रदर्शन था। यह आंदोलन उस समय और तेज हो गया जब मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की एक टिप्पणी को लेकर विवाद खड़ा हुआ, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर बेरोजगार युवाओं की तुलना "कॉकरोच" से की थी। हालांकि बाद में उन्होंने स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि मीडिया के एक वर्ग ने उनकी टिप्पणी को गलत तरीके से पेश किया।

20 जुलाई को हुए "संसद चलो" मार्च के दौरान स्थिति उस समय बेकाबू हो गई जब प्रदर्शनकारी संसद की ओर बढ़ने लगे। दिल्ली पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए बैरिकेड, आंसू गैस और लाठीचार्ज का सहारा लिया। इस दौरान भारी हिंसा हुई, जिसमें कई पुलिसकर्मी और प्रदर्शनकारी दोनों घायल हुए। रिपोर्टों के अनुसार छह आईपीएस अधिकारियों सहित सैकड़ों पुलिसकर्मी घायल हुए थे। घटना के बाद कई प्राथमिकियां (एफआईआर) भी दर्ज की गईं।

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति बागची ने टिप्पणी करते हुए कहा कि चाहे घायल पुलिसकर्मी हों या छात्र, हर किसी को लगी चोट समान रूप से चिंता का विषय है। उन्होंने राज्य से यह भी पूछा कि प्रदर्शनों को नियंत्रित करने के लिए तैनात पुलिसकर्मियों को हेलमेट जैसे पर्याप्त सुरक्षा उपकरण क्यों नहीं दिए गए। अदालत ने स्पष्ट किया कि संविधान के तहत शांतिपूर्ण और वैध विरोध प्रदर्शन का अधिकार पूरी तरह से सुरक्षित है, लेकिन इसके साथ ही कानून-व्यवस्था बनाए रखना भी जरूरी है।

इससे पहले, एक पूर्व आईपीएस अधिकारी और दो अन्य पीड़ितों ने भी सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, जिन्होंने प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल पर रोक लगाने और इन्हें असैन्य उपयोग से हटाने की मांग की थी। इसके अलावा, कुछ वकीलों ने पुलिस कार्रवाई के खिलाफ तत्काल सुनवाई की मांग करते हुए भी याचिका दायर की थी, लेकिन अदालत ने उस समय तुरंत हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था।

राजनीतिक स्तर पर भी इस मुद्दे पर बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्ष के नेता राहुल गांधी सहित कई नेताओं ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और गृह मंत्री अमित शाह से जवाबदेही तय करने और इस्तीफे की मांग की है।

अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, और अगली सुनवाई में अदालत यह तय करेगी कि प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाए, साथ ही भविष्य में पुलिसकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।