स्पोर्ट्स डेस्क, शिवेश कुमार शौर्य।
- ग्लासगो में भारतीय पैरा एथलीटों का जलवा, दिलीप गावित बने कॉमनवेल्थ गेम्स की पुरुष पैरा एथलेटिक्स स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी।
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय पैरा एथलीटों का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है। ग्लासगो में प्रतियोगिता के सातवें दिन भारत ने ट्रैक एंड फील्ड में इतिहास रच दिया। पुरुषों की 100 मीटर T47 स्पर्धा के फाइनल में दिलीप महादु गावित ने 10.71 सेकेंड का समय निकालते हुए न सिर्फ स्वर्ण पदक जीता, बल्कि नया गेम्स रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया। वहीं मोहम्मद बासिल मोर्सिंगनाकथ ने 10.83 सेकेंड के साथ रजत पदक जीतकर भारत को इस स्पर्धा में ऐतिहासिक 1-2 फिनिश दिलाया।
दिलीप गावित की यह जीत भारतीय पैरा एथलेटिक्स के इतिहास की सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हो गई है। वह कॉमनवेल्थ गेम्स की पुरुष पैरा एथलेटिक्स स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं। उनकी यह जीत केवल पदक तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय पैरा खेलों के लगातार बढ़ते स्तर और खिलाड़ियों की मेहनत का भी प्रमाण है।
संघर्ष ने बनाया चैंपियन
महाराष्ट्र के नासिक जिले के तोरण डोंगरी गांव से आने वाले दिलीप गावित की कहानी संघर्ष, साहस और आत्मविश्वास की मिसाल है। किसान परिवार में जन्मे दिलीप ने बचपन में एक हादसे में अपना दाहिना हाथ गंवा दिया था। पेड़ से गिरने के बाद गंभीर चोट लगने और समय पर उचित इलाज नहीं मिलने के कारण उनका हाथ कोहनी के नीचे से काटना पड़ा। लेकिन उन्होंने हालात के आगे हार नहीं मानी। कठिन परिस्थितियों को चुनौती देते हुए उन्होंने एथलेटिक्स को अपना सपना बनाया और आज विश्व मंच पर भारत का तिरंगा बुलंद कर दिया।
दिलीप इससे पहले 2022 एशियन पैरा गेम्स में पुरुषों की 400 मीटर T47 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीत चुके हैं। अब कॉमनवेल्थ गेम्स का गोल्ड जीतकर उन्होंने अपने करियर में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि जोड़ दी है।
बासिल ने भी बढ़ाया भारत का गौरव
दिलीप गावित के साथ-साथ मोहम्मद बासिल मोर्सिंगनाकथ ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक अपने नाम किया। दोनों भारतीय धावकों ने शुरुआत से ही शानदार लय बनाए रखी और फिनिश लाइन पार करते ही भारत के लिए गोल्ड और सिल्वर दोनों पदक सुनिश्चित कर दिए। यह प्रदर्शन बताता है कि भारतीय पैरा एथलेटिक्स अब विश्व स्तर पर लगातार मजबूत दावेदारी पेश कर रहा है।
जीत के बाद क्या बोले दिलीप?
स्वर्ण पदक जीतने के बाद दिलीप गावित ने कहा कि उनकी शुरुआत थोड़ी धीमी रही, लेकिन रेस के दौरान उन्होंने अपनी गति बढ़ाई और अंत तक लय बनाए रखी। उन्होंने माना कि मौसम चुनौतीपूर्ण था और वार्म-अप करना आसान नहीं था। दिलीप ने कहा कि उनका पूरा फोकस आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं और भविष्य के पैरालंपिक में भारत के लिए पदक जीतने पर है।
भारत के लिए गर्व और प्रेरणा का पल
ग्लासगो की ट्रैक पर लहराता तिरंगा सिर्फ दो पदकों की कहानी नहीं, बल्कि भारतीय पैरा खेलों के बदलते दौर की पहचान भी है। दिलीप गावित का स्वर्ण और मोहम्मद बासिल का रजत पदक करोड़ों भारतीयों के लिए प्रेरणा का संदेश है कि कठिन से कठिन परिस्थितियां भी बुलंद हौसलों को रोक नहीं सकतीं। भारतीय पैरा एथलीटों का यह प्रदर्शन आने वाले बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों के लिए भी उम्मीदों को नई उड़ान देता है।







