विदेश डेस्क, वेरॉनिका राय |
फ्रांस । जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ओमान के पास हुए अमेरिकी हमले में भारतीय नाविकों की मौत का मुद्दा उठाया। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अन्य वैश्विक नेताओं की मौजूदगी में नाविकों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई।
जी7 सम्मेलन के आउटरीच सत्र में बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में चल रहे युद्ध और तनाव का समाधान बातचीत, कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से ही निकाला जा सकता है। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्षों से कई देशों को नुकसान हुआ है और भारत के कुछ नागरिकों की भी जान गई है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री व्यापार प्रभावित होने से पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ा है। उन्होंने भारतीय नाविकों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि वैश्विक व्यापार को जोड़ने में नाविकों की अहम भूमिका होती है, इसलिए उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना सभी देशों की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा, "हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि समुद्री रास्ते सुरक्षित रहें और नाविक बिना किसी डर के अपना काम कर सकें।"
पीएम मोदी ने यह भी कहा कि संकट के समय भारत हमेशा दुनिया की मदद के लिए आगे आया है। कोविड-19 महामारी के दौरान भारत ने 150 से अधिक देशों को दवाइयां और वैक्सीन उपलब्ध कराईं। उन्होंने श्रीलंका, अफगानिस्तान, मोजाम्बिक, क्यूबा और जमैका में आई प्राकृतिक आपदाओं का जिक्र करते हुए कहा कि भारत ने हर मुश्किल समय में मानवता को प्राथमिकता देते हुए सहायता पहुंचाई है।
प्रधानमंत्री के इस बयान को भारतीय नाविकों की सुरक्षा और समुद्री व्यापार की रक्षा को लेकर भारत की चिंता के रूप में देखा जा रहा है। जी7 सम्मेलन से उन्होंने दुनिया को शांति, सहयोग और सुरक्षित समुद्री मार्गों का संदेश दिया।







