नेशनल डेस्क, मुस्कान सिंह।
नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के दौरान केंद्र सरकार द्वारा घोषित परीक्षा सुधार टास्क फोर्स को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा द्वारा आईआईटी मद्रास के निदेशक प्रो. वी. कामाकोटी को लेकर की गई टिप्पणी पर अब शिवसेना नेता संजय निरूपम और भाजपा नेताओं ने कड़ी आपत्ति जताई है।
संजय निरूपम ने प्रियंका गांधी से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है। दरअसल, संसद में चर्चा के दौरान प्रियंका गांधी ने परीक्षा सुधार टास्क फोर्स की संरचना पर सवाल उठाते हुए कहा था कि समिति में एक पूर्व आईबी प्रमुख, एक आईटी कंपनी के मालिक और एक "गोमूत्र विशेषज्ञ" को शामिल किया गया है। माना जा रहा है कि उनका इशारा आईआईटी मद्रास के निदेशक प्रो. वी. कामाकोटी की ओर था। इस टिप्पणी के बाद राजनीतिक विवाद शुरू हो गया।
शिवसेना नेता संजय निरूपम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लंबी प्रतिक्रिया देते हुए प्रो. कामाकोटी का बचाव किया। उन्होंने कहा कि प्रो. कामाकोटी देश के प्रतिष्ठित वैज्ञानिक और शिक्षाविद हैं, जिनके पास कई शैक्षणिक उपलब्धियां और तकनीकी विशेषज्ञता है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रो. कामाकोटी पहले भी महत्वपूर्ण राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा प्रक्रियाओं के संचालन में भूमिका निभा चुके हैं और उनकी योग्यता को देखते हुए ही उन्हें परीक्षा सुधार एवं पारदर्शिता से जुड़ी समिति में शामिल किया गया है।
निरूपम ने प्रियंका गांधी की टिप्पणी को अनुचित बताते हुए कहा कि किसी प्रतिष्ठित वैज्ञानिक और शिक्षक का इस तरह मजाक उड़ाना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि भारतीय पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों या उनसे जुड़े शोध का उपहास उड़ाना उचित नहीं है। उनके अनुसार, वैज्ञानिक शोध और भारतीय ज्ञान परंपरा एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं।
उन्होंने आगे कहा कि प्रियंका गांधी को अपने बयान पर प्रो. वी. कामाकोटी से माफी मांगनी चाहिए। निरूपम ने दावा किया कि प्रो. कामाकोटी की शैक्षणिक उपलब्धियां और योगदान सार्वजनिक हैं, जबकि किसी वैज्ञानिक की प्रतिष्ठा पर इस प्रकार की टिप्पणी लोकतांत्रिक बहस की मर्यादा के अनुरूप नहीं है।
इससे पहले भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने भी प्रियंका गांधी के बयान की आलोचना की थी। उन्होंने कहा कि देश के एक प्रतिष्ठित वैज्ञानिक के बारे में इस तरह की टिप्पणी दुर्भाग्यपूर्ण है। अनुराग ठाकुर ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेतृत्व गंभीर मुद्दों पर राजनीतिक टिप्पणी कर लोगों को गुमराह करने का प्रयास कर रहा है।
हालांकि, इस पूरे विवाद पर कांग्रेस की ओर से इस खबर के लिखे जाने तक प्रियंका गांधी की ओर से कोई नई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में परीक्षा सुधार टास्क फोर्स को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का विषय बन गया है।







