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Kisan Budget 2026: सहकारिता से बदलेगी खेती, बढ़ेगी आय?

नेशनल डेस्क, वेरॉनिका राय |

नई दिल्ली। केंद्रीय बजट 2026-27 में भारतीय कृषि को नई दिशा देने का रोडमैप साफ दिखाई देता है। यह बजट किसान को अकेले मेहनतकश के रूप में नहीं, बल्कि संगठित और सशक्त समूह के रूप में आगे बढ़ाने पर केंद्रित है। सहकारिता, तकनीक और आत्मनिर्भरता इन तीन स्तंभों पर खड़ा यह बजट किसानों की आय बढ़ाने के लिए एक मास्टर प्लान पेश करता है।

व्यक्ति नहीं, समूह की ताकत पर भरोसा

भारत की खेती की जड़ें सहकारिता में रही हैं। दूध समितियों से लेकर बीज, उर्वरक और विपणन तक जब-जब किसान संगठित हुआ है, उसने बाजार की ताकत को चुनौती दी है। बजट 2026-27 इसी भरोसे को और मजबूत करता है। संकेत साफ है कि अब खेती व्यक्तिगत प्रयासों से नहीं, बल्कि सामूहिक शक्ति से आगे बढ़ेगी।

‘भारत-विस्तार’ से ज्ञान और डेटा की ताकत

बजट में प्रस्तावित ‘भारत-विस्तार’ पहल केवल किसानों को जानकारी देने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि सहकारी संस्थाओं को ज्ञान और डेटा से लैस करेगी। जब एक ही क्षेत्र के किसान, एफपीओ, सहकारी समितियां और स्वयं सहायता समूह एक साझा डिजिटल मंच पर जुड़ेंगे, तो फैसले व्यक्तिगत नहीं बल्कि सामूहिक होंगे। इससे लागत घटेगी, उत्पादन सुधरेगा और किसानों की सौदेबाजी की ताकत बढ़ेगी।

कृषि ऋण और ब्याज सहायता का दायरा बढ़ा

सस्ती कृषि ऋण व्यवस्था और ब्याज सहायता योजनाएं अब केवल व्यक्तिगत किसानों तक सीमित नहीं रहेंगी। पीएसीएस, दुग्ध समितियां और सहकारी एफपीओ इन योजनाओं के जरिए पूंजी जुटाकर भंडारण, कोल्ड चेन, प्रोसेसिंग और परिवहन में निवेश कर सकेंगे। यह बदलाव खेती को सिर्फ कच्चा माल बेचने से आगे बढ़ाकर मूल्य श्रृंखला का मालिक बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

पशुपालन को मिलेगा नया संबल

बजट 2026-27 में पशुपालन को भी खास प्राथमिकता दी गई है। प्रस्तावित पशु चिकित्सा ढांचे के विस्तार से दुग्ध सहकारी समितियों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं, आधुनिक डायग्नोस्टिक सुविधाएं और प्रजनन केंद्र मिलेंगे। इससे दूध उत्पादन बढ़ेगा, गुणवत्ता सुधरेगी और ‘अमूल मॉडल’ को देश के अन्य हिस्सों में दोहराने का रास्ता खुलेगा।

उच्च मूल्य वाली फसलों पर फोकस

नारियल, काजू, कोको, चंदन, अखरोट और बादाम जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों के लिए विशेष कार्यक्रम प्रस्तावित किए गए हैं। इससे ‘सहकारी वस्तु क्षेत्र’ (कोऑपरेटिव कमोडिटी जोन्स) की नींव पड़ेगी, जहां उत्पादन से लेकर प्रसंस्करण और विपणन तक सहकारी संस्थाएं अहम भूमिका निभाएंगी।

महिला शक्ति और ‘शी-मार्ट’

बजट में ‘शी-मार्ट’ जैसी पहल सहकारिता को सामाजिक मजबूती भी देगी। जब महिला स्वयं सहायता समूह सामूहिक रूप से रिटेल और विपणन संभालेंगे, तो गांवों में पूंजी का प्रवाह बढ़ेगा और स्थानीय बाजार मजबूत होंगे।

बाजार तक सीधी पहुंच

भारत-विस्तार से ज्ञान मिलेगा, ऋण योजनाओं से पूंजी आएगी, पशुपालन और उच्च मूल्य फसलों से निरंतर आय बनेगी और सहकारी संस्थाएं बाजार तक सीधी पहुंच बनाएंगी। इससे किसान बिचौलियों पर निर्भर नहीं रहेगा और अपनी शर्तों पर सौदे कर सकेगा।

खेती का भविष्य: सहकार, तकनीक और आत्मनिर्भरता

बजट 2026-27 साफ संदेश देता है कि भारत का कृषि भविष्य सहकारिता, तकनीक और आत्मनिर्भरता के त्रिकोण पर खड़ा होगा। जब किसान संगठित होगा, ज्ञान से लैस होगा और बाजार में अपनी शर्तों पर उतरेगा, तब ‘सहकारी वस्तु क्षेत्र’ कोई सपना नहीं, बल्कि गांव-गांव की हकीकत बन जाएंगे।