Ad Image
Ad Image
सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा हेट स्पीच मामले की आज सुनवाई की || लोकसभा से निलंबित सांसदों पर आसन पर कागज फेंकने का आरोप || लोकसभा से कांग्रेस के 7 और माकपा का 1 सांसद निलंबित || पटना: NEET की छात्रा के रेप और हत्या को लेकर सरकार पर जमकर बरसे तेजस्वी || स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, केशव मौर्य को होना चाहिए यूपी का CM || मतदाता दिवस विशेष: मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा 'मतदान राष्ट्रसेवा' || नितिन नबीन बनें भाजपा के पूर्णकालिक राष्ट्रीय अध्यक्ष, डॉ. लक्ष्मण ने की घोषणा || दिल्ली को मिली फिर साफ हवा, AQI 220 पर पहुंचा || PM मोदी ने भारतरत्न अटल जी और मालवीय जी की जयंती पर श्रद्धा सुमन अर्पित किया || युग पुरुष अटल बिहारी वाजपेयी जी की जन्म जयंती आज

The argument in favor of using filler text goes something like this: If you use any real content in the Consulting Process anytime you reach.

  • img
  • img
  • img
  • img
  • img
  • img

Get In Touch

MODI-RSS पर व्यंग्यचित्र: हेमंत मालवीय की याचिका पर 14 जुलाई को सुनवाई

नेशनल डेस्क, नीतीश कुमार |

प्रधानमंत्री मोदी और आरएसएस पर आपत्तिजनक व्यंग्यचित्र मामले में हेमंत मालवीय की याचिका पर 14 जुलाई को सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को लेकर कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों सहित एक अशोभनीय व्यंग्यचित्र बनाने के आरोपी हेमंत मालवीय की अंतरिम जमानत याचिका पर 14 जुलाई को सुनवाई करेगा।

न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की अवकाशकालीन पीठ ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर द्वारा शीघ्र सुनवाई के अनुरोध को स्वीकार करते हुए मामले को सोमवार के लिए सूचीबद्ध करने का आदेश दिया।

इंदौर निवासी व्यंग्यचित्रकार हेमंत ने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के 3 जुलाई के आदेश को शीर्ष अदालत में चुनौती दी है। उच्च न्यायालय की एकल पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर शामिल थे, ने अपने निर्णय में कहा था कि हेमंत ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का दुरुपयोग किया है और उन्हें व्यंग्यचित्र बनाते समय विवेक का इस्तेमाल करना चाहिए था। कोर्ट ने उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ के आदेश दिए थे।

हेमंत ने शीर्ष अदालत में दायर याचिका में दलील दी है कि हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता दंडात्मक प्रतीत होती है, न कि किसी ठोस जांच की आवश्यकता या उद्देश्य पर आधारित।