Ad Image
Ad Image
सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा हेट स्पीच मामले की आज सुनवाई की || लोकसभा से निलंबित सांसदों पर आसन पर कागज फेंकने का आरोप || लोकसभा से कांग्रेस के 7 और माकपा का 1 सांसद निलंबित || पटना: NEET की छात्रा के रेप और हत्या को लेकर सरकार पर जमकर बरसे तेजस्वी || स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, केशव मौर्य को होना चाहिए यूपी का CM || मतदाता दिवस विशेष: मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा 'मतदान राष्ट्रसेवा' || नितिन नबीन बनें भाजपा के पूर्णकालिक राष्ट्रीय अध्यक्ष, डॉ. लक्ष्मण ने की घोषणा || दिल्ली को मिली फिर साफ हवा, AQI 220 पर पहुंचा || PM मोदी ने भारतरत्न अटल जी और मालवीय जी की जयंती पर श्रद्धा सुमन अर्पित किया || युग पुरुष अटल बिहारी वाजपेयी जी की जन्म जयंती आज

The argument in favor of using filler text goes something like this: If you use any real content in the Consulting Process anytime you reach.

  • img
  • img
  • img
  • img
  • img
  • img

Get In Touch

NCP का चुनावी ऐलान: भारत नीति पर सख्ती का संकेत

विदेश डेस्क, श्रेयांश पराशर l

ढाका। बांग्लादेश की प्रमुख राजनीतिक पार्टी नेशनल सिटिजन पार्टी (एनसीपी) ने आगामी संसदीय चुनावों से पहले अपना बहुप्रतीक्षित चुनावी घोषणापत्र जारी कर दिया है। पार्टी ने इस घोषणापत्र के जरिए न केवल घरेलू राजनीति और आर्थिक सुधारों पर जोर दिया है, बल्कि भारत के साथ संबंधों को लेकर भी सख्त रुख अपनाने की घोषणा की है। एनसीपी का यह घोषणापत्र ऐसे समय सामने आया है, जब देश में चुनावी माहौल गर्म होता जा रहा है और विभिन्न दल मतदाताओं को लुभाने की कोशिशों में जुटे हैं।

‘मैनिफेस्टो ऑफ ट्रुथ एंड डिग्निटी’ शीर्षक वाले इस घोषणापत्र में एनसीपी ने जवाबदेही, पारदर्शिता और संस्थागत सुधारों को अपनी प्राथमिकता बताया है। पार्टी ने दावा किया है कि सत्ता में आने पर वह अगले पांच वर्षों में एक करोड़ नौकरियां सृजित करेगी। इसके अलावा छोटे व्यवसायों और स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए 100 अरब टका का उद्यमिता कोष स्थापित करने का वादा भी किया गया है। एनसीपी का कहना है कि इससे युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

घोषणापत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों को भी अहम स्थान दिया गया है। पार्टी ने सरकारी संस्थानों में सुधार, भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम और कानून के राज को मजबूत करने की बात कही है। विदेश नीति के मोर्चे पर एनसीपी ने स्पष्ट किया है कि वह राष्ट्रीय हितों से कोई समझौता नहीं करेगी और भारत के साथ संबंधों में संतुलन व आत्मसम्मान को प्राथमिकता देगी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एनसीपी का यह घोषणापत्र चुनावी मुकाबले को और दिलचस्प बना सकता है। खासकर भारत के साथ सख्त रुख की घोषणा से क्षेत्रीय राजनीति पर भी असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। अब देखना होगा कि मतदाता एनसीपी के इन वादों और नीतियों पर कितना भरोसा जताते हैं।