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NCP विलय का सनसनीखेज खुलासा: क्या अजित पवार के निधन से पहले तय हो चुकी थी 'घर वापसी'?

नेशनल डेस्क, श्रेया पाण्डेय |

महाराष्ट्र की राजनीति के कद्दावर नेता और उपमुख्यमंत्री अजित पवार के विमान हादसे में हुए आकस्मिक निधन के कुछ ही दिनों बाद, शरद पवार गुट के वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल ने एक बड़ा राजनीतिक धमाका किया है। पाटिल ने दावा किया है कि राकांपा के दोनों गुटों (अजित और शरद पवार) के विलय की योजना को काफी पहले ही अंतिम रूप दिया जा चुका था। उनके अनुसार, यह महज एक विचार नहीं था, बल्कि एक सुनियोजित 'रोडमैप' था जिसकी जानकारी अजित पवार गुट के सभी वरिष्ठ नेताओं को थी।

सोशल मीडिया मंच 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर साझा किए गए एक वीडियो बयान में, जयंत पाटिल ने कहा कि विलय का निर्णय जनवरी के मध्य में ही तय हो गया था। उन्होंने विस्तार से बताया कि 16 जनवरी को हुई एक गुप्त चर्चा में यह फैसला लिया गया कि आगामी जिला परिषद चुनावों के बाद इसकी औपचारिक घोषणा की जाएगी। मूल रूप से, घोषणा के लिए 8 फरवरी की तारीख चुनी गई थी, लेकिन दिल्ली में एक विवाह समारोह में नेताओं की व्यस्तता के कारण इसे बदलकर 12 फरवरी कर दिया गया था।

पाटिल के दावों में सबसे गंभीर बात यह है कि प्रफुल्ल पटेल, सुनील तटकरे और छगन भुजबल जैसे दिग्गज नेता इस पूरी प्रक्रिया का हिस्सा थे। पाटिल का कहना है कि अजित पवार ने खुद इन नेताओं को भरोसे में लिया था और वे फिर से शरद पवार के मार्गदर्शन में काम करने को तैयार थे। इस खुलासे को शरद पवार के उस हालिया बयान से भी जोड़कर देखा जा रहा है जिसमें उन्होंने कहा था कि पिछले कुछ महीनों से दोनों पक्षों के बीच सुलह की बातचीत चल रही थी।

हालांकि, यह सनसनीखेज दावा अजित पवार के निधन के बाद उपजी संवेदनाओं के बीच आया है, जिससे राज्य का राजनीतिक पारा चढ़ गया है। वर्तमान में, अजित पवार के निधन के बाद उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार को विधायक दल का नेतृत्व सौंपने की चर्चा है, लेकिन जयंत पाटिल के इस बयान ने अब विलय की अटकलों को फिर से जीवित कर दिया है। यदि यह दावा सच है, तो यह सवाल उठना लाजमी है कि क्या अजित पवार गुट के बाकी नेता अब भी उसी विलय के रास्ते पर चलेंगे या सत्ता के समीकरण एक बार फिर बदलेंगे।
विपक्ष और राजनीतिक विश्लेषक इस बयान को अजित पवार की 'अंतिम राजनीतिक इच्छा' के तौर पर देख रहे हैं। अब सबकी निगाहें शरद पवार की अगली चाल और अजित पवार गुट के शेष नेतृत्व की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।