स्टेट डेस्क, आर्या कुमारी।
पटना: नीट की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध मौत को लेकर पुलिस जांच पर उठते सवाल थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। शुरुआती जांच से असंतोष के बाद भले ही मामले की जिम्मेदारी विशेष जांच टीम (SIT) को सौंप दी गई हो, लेकिन विपक्ष और परिजन अब भी सीबीआई जांच की मांग पर अड़े हैं। इस पूरे प्रकरण ने राज्य सरकार के ‘जीरो क्राइम’ के दावों को कठघरे में खड़ा कर दिया है।
मामले को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और गृह मंत्री सम्राट चौधरी विपक्ष के निशाने पर हैं। राष्ट्रीय जनता दल के नेता इसे कानून-व्यवस्था की विफलता बताते हुए लगातार सरकार पर हमलावर हैं। इसी क्रम में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद की पुत्री रोहिणी आचार्य ने भी सोशल मीडिया के जरिए सरकार और जांच एजेंसियों पर तीखा प्रहार किया है।
रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर SIT की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए जांच को दिशाहीन करार दिया। उन्होंने लिखा कि बिहार में यह आम धारणा बनती जा रही है कि शंभू गर्ल्स हॉस्टल से जुड़े इस मामले में पुलिस जांच से किसी ठोस नतीजे की उम्मीद करना केवल एक मुगालता है।
उन्होंने कहा कि घटना को लगभग दो सप्ताह बीत चुके हैं और पोस्टमॉर्टेम रिपोर्ट व अन्य साक्ष्यों से कई तथ्य स्पष्ट हो चुके हैं, इसके बावजूद पुलिस रोज नई-नई थ्योरी सामने लाकर भ्रम की स्थिति बना रही है। इससे यह संदेह गहराता है कि जांच को जानबूझकर भटकाया जा रहा है।
रोहिणी आचार्य ने आरोप लगाया कि हॉस्टल संचालक, संबंधित नर्सिंग होम और अस्पताल, एक डॉक्टर, स्थानीय थाने की महिला पुलिस अधिकारी और वरीय पुलिस अधिकारियों के खिलाफ अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी अब तक क्यों नहीं हो सकी है।
अपने बयान में उन्होंने SIT, मुख्यमंत्री और गृह मंत्री की चुप्पी को भी संदेहास्पद बताया। रोहिणी का आरोप है कि सरकार और पुलिस जांच को लंबा खींचकर मामले को ठंडा करने और दबाव में आकर आरोपियों को बचाने की कोशिश कर रही है।







