नेशनल डेस्क, आर्या कुमारी।
नई दिल्ली। नीट-यूजी पेपर लीक मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने जांच में बड़ी कार्रवाई करते हुए 13 आरोपियों के खिलाफ विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट में आरोपपत्र दाखिल कर दिया है। बुधवार को इस मामले में गठित विशेष अदालत आरोपपत्र पर संज्ञान ले सकती है। यह मामला देशभर में चर्चा का विषय रहा है और अब इसकी न्यायिक प्रक्रिया अहम चरण में पहुंच गई है।
सीबीआई ने इस मामले की जांच पूरी होने के बाद भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम तथा सार्वजनिक परीक्षाएं (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 की विभिन्न धाराओं के तहत आरोपपत्र दाखिल किया है। हालांकि एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि मामले की आगे की जांच अभी जारी रहेगी और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के कुछ अधिकारियों की संभावित भूमिका की भी जांच की जा रही है।
आरोपपत्र में यश यादव, मंगीलाल बीवाल, दिनेश बीवाल, विकास बीवाल, शुभम खैरनार, धनंजय लोखंडे, प्रह्लाद कुलकर्णी, तेजस हर्षद कुमार, डॉ. मनोज शिरुरे, शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर, मनीषा वाघमारे, मनीषा मंडहरे और मनीषा संजय हवलदार को आरोपी बनाया गया है। सीबीआई के अनुसार, सभी आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं और उनके खिलाफ अदालत में पर्याप्त साक्ष्यों के आधार पर आरोपपत्र प्रस्तुत किया गया है।
जांच एजेंसी के मुताबिक, मंगीलाल बीवाल ने अपने बेटे विकास बीवाल को नीट परीक्षा में लाभ दिलाने के उद्देश्य से कथित तौर पर प्रश्नपत्र हासिल करने की योजना बनाई थी। इसके लिए उसने शुभम खैरनार से संपर्क किया था। जांच के दौरान मंगीलाल के मोबाइल फोन से लीक हुआ प्रश्नपत्र बरामद होने का दावा किया गया है, जिसे सीबीआई ने अहम साक्ष्य माना है।
सीबीआई की जांच में यह भी सामने आया कि मंगीलाल बीवाल ने कथित तौर पर यश यादव से 10 लाख रुपये देकर प्रश्नपत्र प्राप्त किया था। पूछताछ के दौरान विकास बीवाल ने अधिकारियों को बताया कि उसकी मुलाकात यश यादव से राजस्थान के सीकर में कोचिंग के दौरान हुई थी। इसके बाद दोनों के बीच संपर्क बना रहा और इसी नेटवर्क के जरिए प्रश्नपत्र हासिल करने की साजिश रची गई।
मामले की शुरुआत 12 मई को एक सरकारी अधिकारी द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के बाद हुई थी, जिसके आधार पर प्राथमिकी दर्ज की गई। इसके बाद सीबीआई ने जांच अपने हाथ में लेकर कई राज्यों में छापेमारी की और विभिन्न तकनीकी व दस्तावेजी साक्ष्य जुटाए। अब अदालत में आरोपपत्र दाखिल होने के बाद इस बहुचर्चित मामले की सुनवाई आगे बढ़ेगी, जबकि जांच एजेंसी अन्य संभावित आरोपियों और जुड़े अधिकारियों की भूमिका की भी पड़ताल जारी रखे हुए है।







