विदेश डेस्क, आर्या कुमारी।
इस्लामाबाद। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के रावलकोट और आसपास के इलाकों में बढ़ती महंगाई के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गए हैं।प्रदर्शनकारियों पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की कार्रवाई में करीब 20 नागरिकों की मौत की आशंका जताई जा रही है, जबकि लगभग 200 लोग घायल बताए जा रहे हैं। इसके अलावा कई लोगों के लापता होने और बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की खबरें भी सामने आई हैं। पिछले कई महीनों से जारी इन प्रदर्शनों के दौरान अब तक 200 से अधिक लोगों की मौत होने का अनुमान लगाया जा रहा है। प्रदर्शनकारी बिजली की बढ़ी दरों, गेहूं पर मिलने वाली सब्सिडी में कटौती, भारी करों और स्थानीय नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं के खिलाफ हिंसा का विरोध कर रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सख्त कर्फ्यू लगाए जाने के दौरान सुरक्षा बल धरना स्थलों को खाली कराने पहुंचे और अलग-अलग स्थानों पर लोगों पर अंधाधुंध गोलीबारी की। उनका दावा है कि कार्रवाई के दौरान रॉकेट प्रोपेल्ड ग्रेनेड और ड्रोन का भी इस्तेमाल किया गया। इससे पहले शांतिपूर्ण तरीके से चल रहे विरोध प्रदर्शनों में सुरक्षा बलों की सख्ती के बाद हालात और बिगड़ गए। स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार की नीतियों और लगातार बढ़ती महंगाई के खिलाफ आवाज उठाने वालों को दबाने के लिए अत्यधिक बल प्रयोग किया जा रहा है। इस कार्रवाई ने क्षेत्र में पहले से मौजूद असंतोष को और बढ़ा दिया है।
ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) के नेता सरदार उमर नजीर ने सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो साझा कर आरोप लगाया कि आवासीय इलाकों को भी ड्रोन हमलों का निशाना बनाया गया। उन्होंने दावा किया कि हमले के बाद मौके से बम के टुकड़े बरामद हुए हैं। नजीर ने पाकिस्तानी सरकार पर कई दिशाओं से हमला करने का आरोप लगाते हुए सुरक्षा बलों की कार्रवाई पर सवाल उठाए। वहीं, शुक्रवार देर रात रावलकोट के उमर फारूक चौक से सामने आए वीडियो में हजारों लोग धरना स्थल पर एकत्र दिखाई दिए। प्रदर्शनकारी सेना और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते नजर आए। सूत्रों के मुताबिक, आंदोलन का दायरा बढ़कर मुजफ्फराबाद तक पहुंच गया है, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव की स्थिति पैदा हो गई है।
रावलकोट में लंबे समय से जारी आंदोलन की प्रमुख वजह पाकिस्तानी सरकार की ओर से 38 सूत्रीय अधिकार चार्टर को पूरा नहीं करना बताई जा रही है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार ने स्थानीय लोगों की मांगों को पूरा करने का भरोसा दिया था, लेकिन अब तक इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। बिजली की महंगी दरों, गेहूं की सब्सिडी में कटौती और भारी कराधान के अलावा नागरिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों ने भी लोगों की नाराजगी बढ़ाई है। वहीं, सुरक्षा बलों की कथित बर्बर कार्रवाई के बाद स्थानीय लोगों का गुस्सा और भड़क गया है। कई प्रदर्शनकारियों के लापता होने और बड़े पैमाने पर लोगों को हिरासत में लिए जाने की सूचनाएं भी सामने आ रही हैं।
इस बीच, सोशल मीडिया पर क्षेत्र की स्थिति से जुड़े कई वीडियो साझा किए जा रहे हैं। इनमें सुरक्षा बलों की ओर से की गई बैरिकेडिंग के कारण आम जनजीवन प्रभावित होता दिखाई दे रहा है। कई इलाकों में रोजमर्रा की गतिविधियां ठप पड़ गई हैं और स्थानीय कारोबारियों ने अपनी दुकानें बंद रखी हैं। लगातार जारी विरोध प्रदर्शन, सुरक्षा बलों की कार्रवाई और लोगों के लापता होने की खबरों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। रावलकोट से शुरू हुआ यह आंदोलन अब आसपास के क्षेत्रों तक फैलने के कारण क्षेत्रीय तनाव का रूप लेता जा रहा है।







