नेशनल डेस्क, मुस्कान कुमारी।
- राजघाट पर INDIA ब्लॉक का प्रदर्शन, 10 अक्टूबर के आंदोलन से पहले बढ़ी सियासी और सुरक्षा गतिविधियां
नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर दिल्ली में राजनीतिक विरोध तेज हो गया है। INDIA ब्लॉक के नेताओं ने राजघाट पर धरना देकर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। विपक्ष का आरोप है कि SIR के दौरान मतदाताओं के नाम हटाने में गड़बड़ी हुई है। निर्वाचन आयोग इन आरोपों से अलग अपनी प्रक्रिया और मतदाता सूची को लेकर आधिकारिक जानकारी देता रहा है।
यह लगातार तीसरा दिन है जब विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर दिल्ली में प्रदर्शन किया। अब नजर 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित बड़े प्रदर्शन पर है। इससे पहले दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ाई गई है।
राजघाट पर जुटे विपक्षी नेता
8 अक्टूबर को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा समेत INDIA ब्लॉक के कई नेता राजघाट पहुंचे। नेताओं ने महात्मा गांधी की समाधि पर श्रद्धांजलि दी और वहीं बैठकर विरोध प्रदर्शन किया।
विपक्ष की मुख्य मांग मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की है। प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने मतदाता सूची में कथित गड़बड़ी को लेकर सवाल उठाए और SIR प्रक्रिया पर आपत्ति जताई।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि उनका प्रदर्शन शांतिपूर्ण है और मतदान के अधिकार को सुरक्षित रखना जरूरी है। कांग्रेस नेता इमरान मसूद ने भी कहा कि उनका आंदोलन CEC के इस्तीफे तक जारी रहेगा।
विपक्ष की ओर से राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात का समय भी मांगा गया है। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल के मुताबिक, इसके लिए राष्ट्रपति भवन को पत्र भेजे गए हैं। हालांकि 8 अक्टूबर तक मुलाकात का समय तय नहीं हुआ था।
10 अक्टूबर के प्रदर्शन से पहले बढ़ी हलचल
दिल्ली में 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर SIR के खिलाफ प्रदर्शन की तैयारी है। इस आंदोलन में छात्र संगठनों, नागरिक समूहों और किसान संगठनों के शामिल होने की बात कही गई है।
प्रस्तावित प्रदर्शन का एक प्रमुख मुद्दा मतदाता सूची में बदलाव है। प्रदर्शनकारी समूह SIR को वापस लेने और मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
प्रदर्शन से पहले दिल्ली पुलिस ने कई संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा बढ़ाई है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त के आधिकारिक आवास और निर्वाचन आयोग के कार्यालय के आसपास भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है।
दिल्ली सरकार ने 9 और 10 अक्टूबर को शहर में शराब की दुकानों को बंद रखने का आदेश भी दिया है। यह फैसला सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए एहतियाती कदम के तौर पर लिया गया है।
आरोपों के बीच निर्वाचन आयोग का पक्ष भी जरूरी
SIR को लेकर विपक्ष की ओर से कई गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने और बाद में कुछ नाम दोबारा जोड़े जाने जैसे दावे शामिल हैं।
हालांकि इन दावों को सीधे प्रमाणित तथ्य के रूप में देखना सही नहीं होगा। निर्वाचन आयोग के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक, SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना, पात्र मतदाताओं को शामिल करना और मृत, स्थानांतरित या अपात्र मतदाताओं के नाम हटाना है।
बिहार में 2025 के SIR के अंतिम आंकड़ों के अनुसार, 24 जून से 30 सितंबर 2025 के बीच प्रक्रिया पूरी हुई। आयोग के अनुसार, ड्राफ्ट सूची से करीब 65 लाख नाम हटाए गए थे, जबकि दावों और नए पंजीकरण की प्रक्रिया के जरिए 21.53 लाख पात्र मतदाता जोड़े गए। अंतिम सूची में करीब 7.42 करोड़ मतदाता थे।
इन आंकड़ों को समझते समय यह फर्क जरूरी है कि ड्राफ्ट सूची से हटाया गया हर नाम स्थायी रूप से मतदान के अधिकार से बाहर हो गया, ऐसा मानना सही नहीं है। प्रक्रिया में दावे और आपत्तियां दाखिल करने का प्रावधान भी रखा गया था।
विवाद में कई राज्यों की राजनीति भी जुड़ी
SIR को लेकर विरोध केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रहा। 8 अक्टूबर को महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, तेलंगाना और त्रिपुरा समेत कई राज्यों में भी कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने प्रदर्शन किए।
मध्य प्रदेश में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कई शहरों में प्रदर्शन किया। तेलंगाना में भी INDIA ब्लॉक से जुड़े दलों ने रैली निकाली। त्रिपुरा में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन किया।
उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में भी प्रदर्शन के दौरान निषेधाज्ञा के उल्लंघन के आरोप में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं के खिलाफ FIR दर्ज की गई।
इस बीच पूर्व न्यायाधीशों के एक समूह ने निर्वाचन आयोग के खिलाफ चल रहे अभियान पर चिंता जताई। दूसरी ओर, नागरिक समूहों और कुछ पूर्व न्यायाधीशों ने SIR को लेकर अपनी आपत्तियां सार्वजनिक की हैं। इससे साफ है कि विवाद अब राजनीतिक विरोध के साथ संवैधानिक और चुनावी प्रक्रिया की बहस का रूप भी ले चुका है।
सोशल मीडिया के दावों पर भी सवाल
SIR विवाद के बीच सोशल मीडिया पर मतदाता सूची से जुड़े कई आंकड़े और दावे तेजी से फैल रहे हैं। कुछ प्रदर्शनों में अलग-अलग राज्यों में हटाए गए या जोड़े गए मतदाताओं की संख्या को लेकर सवाल उठाए गए।
ऐसे दावों को समझने के लिए आधिकारिक मतदाता सूची और निर्वाचन आयोग के दस्तावेज देखना जरूरी है। आयोग के मतदाता सेवा पोर्टल पर मतदाता अपना नाम खोज सकते हैं और SIR से जुड़े दस्तावेज भी देख सकते हैं।







