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UGC 2026 नियमों पर लगा रोक: SC

नेशनल डेस्क, श्रेया पाण्डेय |

सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के 'समता विनियम 2026' पर लगाई रोक: कहा- ये नियम समाज में विभाजन पैदा कर सकते हैं...

​नई दिल्ली: देश की सर्वोच्च अदालत ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा हाल ही में अधिसूचित 'उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देना विनियम, 2026' पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। गुरुवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इन नियमों की संवैधानिक वैधता पर सवाल उठाते हुए इन्हें "अस्पष्ट और दुरुपयोग के योग्य" करार दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब तक इस मामले का अंतिम निपटारा नहीं हो जाता, तब तक 2012 के पुराने नियम ही लागू रहेंगे। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि आजादी के 75 साल बाद हमारा लक्ष्य एक जातिविहीन समाज के निर्माण का होना चाहिए, न कि ऐसे नियमों का जो कैंपस के भीतर छात्रों के बीच दरार पैदा करें।

​विवाद का मुख्य केंद्र इन नियमों में दी गई भेदभाव की परिभाषा है। याचिकाओं में आरोप लगाया गया था कि यूजीसी ने जाति-आधारित भेदभाव के दायरे को केवल अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) तक सीमित कर दिया है, जिससे सामान्य वर्ग के छात्र सुरक्षा के दायरे से बाहर हो गए हैं। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि भेदभाव किसी भी छात्र के साथ हो सकता है, और कानून को सभी के लिए समान होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क से सहमति जताते हुए कहा कि भेदभाव की ऐसी सीमित परिभाषा से 'रिवर्स डिस्क्रिमिनेशन' का खतरा पैदा हो सकता है, जो समाज के सामाजिक ताने-बाने के लिए घातक होगा।

​कोर्ट ने केंद्र सरकार और यूजीसी को कड़ा निर्देश देते हुए 19 मार्च 2026 तक जवाब दाखिल करने को कहा है। अदालत ने सुझाव दिया है कि इन नियमों की समीक्षा के लिए विशेषज्ञों की एक उच्च-स्तरीय समिति बनाई जानी चाहिए जो यह सुनिश्चित करे कि नियम समावेशी और निष्पक्ष हों। इस आदेश के बाद अब देशभर के विश्वविद्यालयों में पुराने नियमों के तहत ही शिकायत निवारण समितियां कार्य करेंगी। इस फैसले को उन छात्र समूहों और नागरिक संगठनों की एक बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है जो पिछले कई हफ्तों से इन विवादित नियमों का विरोध कर रहे थे।