नेशनल डेस्क, श्रेया पाण्डेय
नई दिल्ली। संसद के मौजूदा सत्र में केंद्र सरकार ने डिजिटल भुगतान से जुड़े कानूनों में बड़ा बदलाव करते हुए एक ऐसा विधेयक पारित करा लिया है, जिससे भविष्य में UPI लेनदेन पर शुल्क लगाने का रास्ता खुल गया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को लोकसभा में "कराधान एवं अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026" पेश किया था, जिसे गुरुवार को बिना बहस के ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।
इस विधेयक के जरिये आयकर अधिनियम 2025, वित्त अधिनियम 2026 और भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम 2007 में संशोधन किया गया है। सबसे अहम बदलाव यह है कि अब यह तय करने का अधिकार केंद्र सरकार के पास होगा कि कौन-से डिजिटल भुगतान माध्यम शुल्क-मुक्त रहेंगे और किन पर शुल्क लगाया जा सकता है। पहले यह सूची आयकर कानून के तहत तय होती थी, जिसे अब हटा दिया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, इससे मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) यानी व्यापारियों से डिजिटल भुगतान स्वीकार करने पर लिया जाने वाला शुल्क, बड़े व्यापारियों के लिए बहाल हो सकता है, जबकि आम उपभोक्ताओं और छोटे व्यापारियों को इससे बाहर रखे जाने की बात कही जा रही है।
गौरतलब है कि जनवरी 2020 से UPI और RuPay लेनदेन को पूरी तरह शुल्क-मुक्त रखा गया था, ताकि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा मिल सके। यह रणनीति काफी हद तक सफल भी रही — राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) के आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2026 में UPI के जरिये करीब 241.6 अरब लेनदेन हुए, जिनकी कुल राशि लगभग 314 लाख करोड़ रुपये रही। लेकिन इसी वजह से PhonePe जैसी कंपनियों का मुख्य भुगतान कारोबार लगभग शून्य राजस्व पर चल रहा है, क्योंकि UPI पर कोई शुल्क नहीं लगता।
वैश्विक ब्रोकरेज फर्म जेफरीज के एक आकलन के मुताबिक, यदि 2,000 रुपये से अधिक के UPI लेनदेन पर 15 से 30 बेसिस प्वाइंट का MDR लगाया जाता है, तो वित्त वर्ष 2027-28 तक इससे 5,000 से 10,000 करोड़ रुपये तक का राजस्व जुटाया जा सकता है।
हालांकि यह स्पष्ट किया गया है कि विधेयक पारित होने से तुरंत कोई शुल्क लागू नहीं होगा। वास्तविक शुल्क दर, वह सीमा जिस पर शुल्क लागू होगा, और बैंकों-भुगतान कंपनियों के बीच राजस्व बंटवारे का फॉर्मूला जैसे अहम पहलू अभी तय होने बाकी हैं। उद्योग जगत के जानकारों का मानना है कि यह संशोधन MDR तय करने का अधिकार भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की निगरानी की ओर भी शिफ्ट करता है।
सरकार की ओर से आगे कोई अधिसूचना जारी होने पर ही यह साफ हो पाएगा कि किन लेनदेन पर, कितनी राशि से ऊपर, और किस दर से शुल्क लागू होगा। तब तक आम उपयोगकर्ताओं के लिए UPI पहले की तरह मुफ्त बना रहेगा।







