विदेश डेस्क, ऋषि राज |
वॉशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव के बीच आखिरकार दोनों देशों के बीच हुए समझौते के 14 प्रमुख बिंदु सार्वजनिक कर दिए गए हैं। व्हाइट हाउस ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस समझौता ज्ञापन (एमओयू) को जारी करते हुए इसे पश्चिम एशिया में शांति बहाली की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया। माना जा रहा है कि यह समझौता क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
जारी दस्तावेज के अनुसार, दोनों देशों ने सैन्य कार्रवाई रोकने, परमाणु कार्यक्रम पर निगरानी बढ़ाने, होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने, प्रतिबंधों में चरणबद्ध राहत देने और आर्थिक सहयोग को बढ़ाने पर सहमति बनाई है। इसके अलावा, कैदियों की अदला-बदली, मानवीय सहायता और क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग जैसे मुद्दे भी इस समझौते में शामिल हैं।
अमेरिकी प्रशासन ने कहा कि यह समझौता केवल युद्धविराम नहीं बल्कि भविष्य के स्थायी संबंधों की नींव रख सकता है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे “नई शुरुआत” बताते हुए कहा कि इससे पश्चिम एशिया में शांति की नई उम्मीद जगी है।
दूसरी ओर, ईरान ने भी इस समझौते को अपने राष्ट्रीय हितों के अनुरूप बताया है। ईरानी अधिकारियों ने कहा कि देश की संप्रभुता और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए हर बिंदु पर सहमति बनी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह समझौता सफलतापूर्वक लागू होता है तो तेल बाजार में स्थिरता लौट सकती है और वैश्विक व्यापार को राहत मिल सकती है। हालांकि कुछ देशों ने इस पर सतर्क प्रतिक्रिया दी है और इसके क्रियान्वयन पर नजर बनाए रखने की बात कही है।
अब दोनों देशों के बीच 19 जून को स्विट्जरलैंड में आधिकारिक हस्ताक्षर होने हैं, जिस पर पूरी दुनिया की नजर टिकी हुई है।







