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अंतरराष्ट्रीय सूचना का अधिकार दिवस सम्मेलन- 2026

नेशनल डेस्क, अश्विनी कुमार।

  • देशभर से जुटे विशेषज्ञ, शिक्षाविद् एवं सूचना अधिकार कार्यकर्ता।
  • डिजिटल युग में सूचना की शुचिता और पारदर्शिता पर मंथन

नई दिल्ली: आरटीआई इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, नई दिल्ली द्वारा अंतरराष्ट्रीय सूचना का अधिकार दिवस एवं सम्मेलन-2026 का आयोजन इंडिया इंटरनेशनल सेंटर, नई दिल्ली में किया गया। इस वर्ष सम्मेलन का मुख्य विषय “डिजिटल युग में सूचना की शुचिता को बनाए रखना : सूचना अव्यवस्था से निपटने में सूचना तक पहुंच की भूमिका” रहा। सम्मेलन में देश के विभिन्न राज्यों से आए सूचना का अधिकार विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, विश्वविद्यालयों के कुलपतियों, प्रशासनिक अधिकारियों एवं शोधकर्ताओं ने सूचना के अधिकार, डिजिटल युग में सूचना की विश्वसनीयता तथा पारदर्शी प्रशासन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों के सम्मान एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। भारतीय सूचना अधिकार संस्थान, नई दिल्ली के अध्यक्ष मनीष कुमार शेखर ने स्वागत भाषण एवं सम्मेलन के विषय की प्रस्तुति की। उन्होंने सूचना के अधिकार को लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिकों की भागीदारी, जवाबदेही और पारदर्शिता का महत्वपूर्ण माध्यम बताते हुए डिजिटल युग में विश्वसनीय सूचना की आवश्यकता पर जोर दिया।
कार्यक्रम में गोवा राज्य सूचना आयोग के राज्य मुख्य सूचना आयुक्त अरविंद कुमार एच. नायर ने विशिष्ट अतिथि के रूप में संबोधित किया। उन्होंने सूचना के अधिकार की प्रभावशीलता, सूचना आयोगों की भूमिका तथा नागरिकों तक समयबद्ध और प्रामाणिक सूचना पहुंचाने की आवश्यकता पर विचार रखे।

इस अवसर पर पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. संजय पासवान ने सम्मेलन को संबोधित किया। उन्होंने सूचना के अधिकार को लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था की मजबूती से जोड़ते हुए पारदर्शिता और जनभागीदारी के महत्व पर प्रकाश डाला। सम्मेलन में सूचना अधिकार विशेषज्ञ सुभाष चंद्र अग्रवाल ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने सूचना के अधिकार से जुड़े विभिन्न पहलुओं तथा नागरिकों द्वारा सूचना के अधिकार के प्रभावी उपयोग पर चर्चा की। कार्यक्रम में कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज के अध्यक्ष एवं चांसलर डॉ. प्रिया रंजन त्रिवेदी ने संबोधित किया। उन्होंने उच्च शिक्षा संस्थानों में पारदर्शिता, जवाबदेही और सूचना के महत्व पर विचार व्यक्त किए।

सम्मेलन में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपतियों ने भी अपने विचार रखे। इनमें सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ हरियाणा के कुलपति डॉ. टंकेश्वर कुमार, तथा पांडिचेरी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. पी. प्रकाश बाबू शामिल रहे। कार्यक्रम के दौरान ‘पीआईओ हैन्डबुक’ पुस्तक का विमोचन भी किया गया। यह पुस्तिका सूचना के अधिकार कानून के तहत लोक सूचना अधिकारियों की भूमिका एवं दायित्वों के संदर्भ में उपयोगी मानी जा रही है। स्म्मेलन में लाल किले से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पुस्तक का लोकार्पण भी किया गया। सम्मेलन में उत्कृष्ट कार्य के लिए विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को ‘अंतर्राष्ट्रीय उच्च शिक्षा उत्कृष्टता सम्मान’, एक विद्यालय को ‘अंतर्राष्ट्रीय विद्यालय शिक्षा उत्कृष्टता सम्मान’ तथा सूचना के अधिकार के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले आरटीआई विशेषज्ञों को ‘अंतर्राष्ट्रीय आरटीआई प्रोत्साहन सम्मान’ से सम्मानित किया जाएगा।

दोपहर के सत्र में आईजीटीएएमएसयू, अरुणाचल प्रदेश के चांसलर एवं ग्लोबल पीस फाउंडेशन, भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) मार्कंडेय राय ने संबोधित किया। इसके अलावा चंडीगढ़ के आरटीआई विशेषज्ञ सुरेंद्र बहनूट ने भी अपने विचार रखे।
सम्मेलन के दूसरे सत्र में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों, शिक्षण संस्थानों एवं सार्वजनिक क्षेत्र के प्रतिष्ठानों से जुड़े विशेषज्ञों ने भाग लिया। इनमें इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी रायचूर के डॉ. मेहबूब आलम, तेजपुर विश्वविद्यालय के सोभन महंत एवं समरेश बर्मन, रेयालसीमा विश्वविद्यालय के डॉ. एस. वेंकटेश्वरलु, दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी के डॉ. विवेक त्रिपाठी एवं डॉ. रोली पुरवार, गोंडवाना विश्वविद्यालय के डॉ. हेमंत के. बरसागड़े, तमिलनाडु डॉ. अंबेडकर लॉ यूनिवर्सिटी की जी.वी. विधुषा, गोवा मल्टी-फैकल्टी कॉलेज के प्रो. (डॉ.) शेख मोहम्मद परवेज अल-उस्मानी सहित अनेक विशेषज्ञ एवं अधिकारी शामिल हुए।

सम्मेलन में मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड के देवेश दुबे, अनिल कुमार मिश्रा, बी. दत्तात्रेय एवं शिवम यादव, , एसआईएल (इंडिया) लिमिटेड के बलेंद्र प्रसाद मिश्रा, श्री चित्रा तिरुनाल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी की डॉ. ए. माया नंदकुमार, आंध्र विश्वविद्यालय के प्रो. वी. श्रीमन्नारायण मूर्ति, माधबदेव विश्वविद्यालय के डॉ. खिरापद दत्ता, लखनऊ के डॉ. बलेश्वर प्रसाद, इंदौर के डॉ. अश्विनी तापड़े, आईसीएआर-नेशनल रिसर्च सेंटर ऑन इक्वाइन्स से जुड़े डी.डी. शर्मा एवं गौरव सोम, आरटीआई विशेषज्ञ अशोक गोयल, सी.बी प्रसाद, झबलु राम  सहित बड़ी संख्या में प्रतिभागियों ने भाग लिया।

सम्मेलन के दौरान पेपर प्रस्तुतीकरण, विषय विशेषज्ञों के साथ चर्चा एवं ओपन हाउस का आयोजन भी किया गया। विभिन्न सत्रों में डिजिटल सूचना की विश्वसनीयता, सूचना के अधिकार की वर्तमान प्रासंगिकता, पारदर्शिता, जवाबदेही तथा सूचना के प्रभावी उपयोग से संबंधित विषयों पर विचारों का आदान-प्रदान हुआ। कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों को सहभागिता प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। आरटीआई इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, दिल्ली के निदेशक (पीआर) कुंदन कुमार मधुकर ने धन्यवाद ज्ञापित किया एवं मंच संचालन स्वतंत्र निदेशक ओजस्वी ने किया ।

सम्मेलन में देश के विभिन्न हिस्सों से आए शिक्षाविदों, आरटीआई विशेषज्ञों, प्रशासनिक अधिकारियों एवं शोधकर्ताओं की व्यापक भागीदारी ने सूचना के अधिकार को डिजिटल युग की बदलती सूचना व्यवस्था से जोड़कर देखने की आवश्यकता को रेखांकित किया। सम्मेलन ने सूचना की शुचिता, पारदर्शिता और नागरिकों की सूचना तक पहुंच को लोकतांत्रिक व्यवस्था के महत्वपूर्ण आधार के रूप में सामने रखा।