स्टेट डेस्क, एन के सिंह।
अपराधी भोले-भाले लोगों को 7 हजार का लालच देकर उनके नाम पर खाते खुलवा करोड़ों की ठगी करते थे, 17 पासबुक, 16 एटीएम व 15 चेकबुक बरामद।
पूर्वी चंपारण: बिहार की पूर्वी चंपारण पुलिस ने डिजिटल अपराध की दुनिया में एक बहुत बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक करते हुए एक ऐसे अंतर्राज्यीय साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसके तार देश के आधा दर्जन राज्यों से जुड़े हुए हैं। साइबर थाने की विशेष टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी करते हुए इस गिरोह के चार सक्रिय सदस्यों को दबोचने में सफलता प्राप्त की है। पकड़े गए अपराधियों के पास से भारी मात्रा में बैंकिंग उपकरण बरामद हुए हैं, जो इनके खतरनाक मंसूबों और बड़े नेटवर्क की गवाही दे रहे हैं। इस पूरी कार्रवाई का नेतृत्व पुलिस उपाधीक्षक सह साइबर थानाध्यक्ष अभिनव परासर कर रहे थे, जिनके नेतृत्व में गठित टीम ने अपराधियों के गढ़ में घुसकर इस पूरे रैकेट को ध्वस्त कर दिया।
इस पूरे नेटवर्क का खुलासा तब हुआ जब पुलिस को रामगढ़वा थाना क्षेत्र के बौधा गांव निवासी कुंदेश कुमार कुशवाहा उर्फ छोटू के बारे में पुख्ता जानकारी मिली। छोटू का काम बहुत ही शातिराना था; वह गांव के भोले-भाले और सीधे-साधे लोगों को चंद रुपयों का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाता था और उनके मोबाइल सिम कार्ड व एटीएम हासिल कर लेता था। पुलिस ने जब जाल बिछाकर कुंदेश उर्फ छोटू को गिरफ्तार किया, तो पूछताछ के दौरान उसने एक के बाद एक कई चौंकाने वाले नाम उगले। उसकी निशानदेही पर पुलिस ने रक्सौल के हरनाही गांव में धावा बोला और वहां से नीरज कुमार तथा शुभम कुमार को गिरफ्तार किया। इन दोनों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस इस गिरोह के मास्टरमाइंड तक जा पहुँची, जिसका नाम मोहित राज उर्फ रोमियो उर्फ रोमी है। रक्सौल के सभ्यता नगर निवासी मोहित राज ही इस पूरे काले कारोबार का संचालक था, जो ठगी के पैसों के ट्रांजेक्शन को मैनेज करता था।
पूछताछ में यह कड़वा सच सामने आया कि यह गिरोह आम लोगों की मजबूरी और लालच का फायदा उठाकर उनके दस्तावेजों पर बैंकिंग किट तैयार करता था। मास्टरमाइंड मोहित राज उर्फ रोमियो प्रत्येक बैंक खाते के बदले कुंदेश और उसके साथियों को 7,000 रुपये का कमीशन देता था। इन खातों का उपयोग तमिलनाडु, महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश और झारखंड जैसे राज्यों में होने वाली साइबर ठगी की रकम को खपाने और उसे निकालने के लिए किया जाता था। बरामद पासबुक और चेकबुक की तकनीकी जांच में यह स्पष्ट हो गया है कि इस गिरोह के खिलाफ देश के विभिन्न कोनों में साइबर अपराध के कई मामले पहले से दर्ज हैं। यह गिरोह न केवल ठगी करता था, बल्कि अवैध धन को सफेद करने के लिए एक व्यवस्थित 'मनी लॉन्ड्रिंग' नेटवर्क चला रहा था।
पुलिस की इस छापेमारी में गिरोह के पास से 4 मोबाइल फोन, 17 बैंक पासबुक, 15 चेकबुक, 16 एटीएम कार्ड, 4 ब्लैंक चेक और एक क्रेडिट कार्ड बरामद किया गया है। छापेमारी टीम में पु०अ०नि० प्रत्युष कुमार विक्की, शिवम सिंह, सौरभ कुमार आजाद और सुमित कुमार सहित कई जांबाज सिपाही शामिल थे, जिन्होंने बड़ी मुस्तैदी से इस ऑपरेशन को अंजाम दिया। फिलहाल पुलिस इन सभी अपराधियों से गहन पूछताछ कर रही है ताकि इनके गिरोह से जुड़े अन्य सफेदपोशों और देश के अन्य हिस्सों में बैठे इनके आकाओं का पता लगाया जा सके। इस गिरफ्तारी के बाद साइबर पुलिस ने आम जनता को एक बार फिर आगाह किया है कि वे किसी भी कीमत पर अपना बैंक खाता या सिम कार्ड किसी दूसरे को इस्तेमाल करने के लिए न दें, वरना वे अनजाने में ही किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय अपराध का हिस्सा बन सकते हैं।







