लोकल डेस्क, ऋषि राज।
रक्सौल। मानव जीवन का सबसे सुंदर आधार विश्वास, अपनापन और सच्चे रिश्ते हैं। जब किसी व्यक्ति को यह अनुभव होता है कि कोई उसे बिना किसी स्वार्थ के अपना मानता है, तो उसके जीवन में आत्मविश्वास, सुरक्षा और सुख का संचार होता है। लेकिन आज का युग एक विचित्र विरोधाभास का साक्षी बन गया है। लोग अपनेपन का प्रदर्शन तो बड़े आत्मीय ढंग से करते हैं, परंतु अवसर आने पर वही लोग कपट, छल और धोखे का सहारा लेने से भी नहीं हिचकते। यही कारण है कि आज रिश्तों में विश्वास का संकट गहराता जा रहा है।
उक्त विचार लायंस क्लब इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 322 ई के जोनल चेयरपर्सन सह डिस्ट्रिक्ट चेयरपर्सन एवं भारत विकास परिषद् , रक्सौल के सेवा संयोजक सह मीडिया प्रभारी सह सामाजिक कार्यकर्ता बिमल सर्राफ ने प्रेस से साझा किया।
प्रश्न यह है कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है? इसका सबसे बड़ा कारण बढ़ता हुआ स्वार्थ है। आज अनेक लोग संबंधों को भी लाभ और हानि की दृष्टि से देखने लगे हैं। जब तक किसी से अपना हित सिद्ध होता है, तब तक अपनापन दिखाई देता है, लेकिन जैसे ही स्वार्थ पूरा हो जाता है, वही संबंध बोझ लगने लगता है। ऐसे में प्रेम और विश्वास केवल औपचारिकता बनकर रह जाते हैं।
दूसरा कारण है प्रतिस्पर्धा और दिखावे की संस्कृति। आधुनिक जीवन में सफलता, धन और प्रतिष्ठा की दौड़ इतनी तेज हो गई है कि कई लोग नैतिक मूल्यों को पीछे छोड़ देते हैं। वे अपने उद्देश्य की पूर्ति के लिए झूठ, छल और विश्वासघात को भी साधन बना लेते हैं। बाहरी मुस्कान के पीछे छिपा स्वार्थ धीरे-धीरे समाज की सबसे बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
सोशल मीडिया और आभासी दुनिया ने भी इस प्रवृत्ति को बढ़ावा दिया है। लोग वास्तविक चरित्र से अधिक अपनी छवि को महत्व देने लगे हैं। चेहरे पर मुस्कान और शब्दों में मिठास होती है, लेकिन मन में ईर्ष्या, प्रतिस्पर्धा और स्वार्थ छिपा रहता है। परिणामस्वरूप रिश्तों की गहराई कम होती जा रही है और विश्वास कमजोर पड़ता जा रहा है।
यह भी सत्य है कि हर व्यक्ति ऐसा नहीं होता। आज भी समाज में ऐसे लोग हैं जो निस्वार्थ भाव से संबंध निभाते हैं, कठिन समय में साथ खड़े रहते हैं और बिना किसी अपेक्षा के दूसरों की सहायता करते हैं। यही लोग समाज की वास्तविक शक्ति हैं और इन्हीं के कारण मानवता आज भी जीवित है।
हमें यह समझना होगा कि छल से कुछ समय के लिए लाभ अवश्य मिल सकता है, लेकिन सम्मान कभी नहीं मिलता। विश्वास एक बार टूट जाए तो उसे दोबारा जोड़ना अत्यंत कठिन होता है। इसलिए जीवन में सच्चाई, ईमानदारी और पारदर्शिता को अपनाना ही सबसे बड़ी सफलता है।
यदि हम चाहते हैं कि समाज में विश्वास और प्रेम बना रहे, तो सबसे पहले हमें स्वयं को बदलना होगा। अपनेपन का केवल दिखावा नहीं, बल्कि वास्तविक अपनापन देना होगा। दूसरों के विश्वास की रक्षा करना, अपने वचन का पालन करना और स्वार्थ से ऊपर उठकर संबंधों को निभाना ही सच्ची मानवता है।
अंततः यह याद रखना चाहिए कि संसार में धन, पद और प्रसिद्धि अस्थायी हैं, लेकिन सच्चे संबंध और विश्वास जीवन की सबसे बड़ी पूंजी हैं। जो व्यक्ति अपनेपन के नाम पर धोखा देता है, वह अंततः स्वयं ही विश्वास खो देता है। जबकि जो व्यक्ति सच्चे मन से रिश्तों को निभाता है, वही लोगों के हृदय में स्थायी स्थान बना लेता है। इसलिए हमें दिखावे की नहीं, बल्कि सच्चे अपनत्व, ईमानदारी और मानवता की संस्कृति को अपनाना चाहिए। यही एक स्वस्थ, संवेदनशील और विश्वासपूर्ण समाज की आधारशिला है।







