नेशनल डेस्क, आर्या कुमारी।
श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) प्रमुख महबूबा मुफ्ती के हालिया बयान और उसकी सफाई को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि महबूबा ने अपने बयान पर केवल अफसोस जताया है, जबकि उन्हें स्पष्ट रूप से माफी मांगनी चाहिए थी। उमर अब्दुल्ला का कहना है कि किसी बयान पर अफसोस व्यक्त करना और उसके लिए माफी मांगना दोनों अलग-अलग बातें हैं और इन दोनों के बीच बड़ा अंतर होता है।
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि सबसे पहले यह देखा जाना चाहिए कि क्या महबूबा मुफ्ती ने अपनी सफाई में कहीं भी "माफी" शब्द का इस्तेमाल किया है। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति केवल यह कहे कि उसके बयान से किसी की भावनाएं आहत हुई हों तो उसे अफसोस है, तो इसे वास्तविक माफी नहीं माना जा सकता। उनके मुताबिक, जब किसी बयान में "अगर" जैसे शब्द जोड़े जाते हैं, तो उससे यह संकेत मिलता है कि व्यक्ति अपने बयान की पूरी जिम्मेदारी स्वीकार नहीं कर रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि महबूबा मुफ्ती के उस बयान को लेकर विवाद खड़ा हुआ था, जिसमें उन्होंने कश्मीर में पैलेट गन के इस्तेमाल के संदर्भ में कहा था कि घाटी की परिस्थितियां अलग थीं और सुरक्षा बल आतंकवाद से निपट रहे थे। इस बयान को लेकर कई लोगों ने आरोप लगाया कि वह कश्मीरियों के खिलाफ बल प्रयोग को उचित ठहरा रही हैं। बाद में महबूबा ने सफाई देते हुए कहा कि उनका ऐसा कोई इरादा नहीं था और उनके बयान को गलत तरीके से समझा गया।
उमर अब्दुल्ला ने इस पूरे विवाद के दौरान पीडीपी विधायक वहीद पारा की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कई दिनों तक यह दावा किया गया कि महबूबा मुफ्ती का वायरल वीडियो कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की मदद से तैयार किया गया है। अब जबकि स्वयं महबूबा मुफ्ती ने स्पष्ट कर दिया है कि वीडियो में किसी तरह की एआई तकनीक का इस्तेमाल नहीं हुआ था, तो उन लोगों को भी जवाब देना चाहिए जिन्होंने लगातार इस दावे को आगे बढ़ाया। उन्होंने कहा कि जिम्मेदार पद पर बैठे लोगों को गलत जानकारी फैलाने से बचना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि पांच दिनों तक इस पूरे मामले को दबाने और लोगों को भ्रमित करने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि अब जब खुद पार्टी अध्यक्ष ने वीडियो की प्रामाणिकता स्वीकार कर ली है, तो उन नेताओं की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए जिन्होंने इसे फर्जी बताकर लोगों को गुमराह किया। उमर अब्दुल्ला ने कहा कि ऐसे मामलों में राजनीतिक जिम्मेदारी निभाना बेहद जरूरी है।
वहीं, महबूबा मुफ्ती ने अपने बयान को लेकर सफाई देते हुए कहा कि उनका उद्देश्य कभी भी कश्मीरियों के खिलाफ बल प्रयोग का समर्थन करना नहीं था। उन्होंने कहा कि वह केवल यह बताना चाहती थीं कि घाटी में आतंकवाद की स्थिति के कारण सुरक्षा बलों के पास कार्रवाई का एक बहाना होता है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि उनके बयान से किसी की भावनाएं आहत हुई हैं तो उन्हें इसका अफसोस है। हालांकि, उनके इस स्पष्टीकरण के बावजूद राजनीतिक विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है और विपक्ष लगातार उनसे स्पष्ट माफी की मांग कर रहा है।







