विदेश डेस्क, मुस्कान कुमारी।
ब्रिटेन। ब्रिटेन के कोवेंट्री में अमेज़न के एक बड़े फुलफिलमेंट सेंटर में टीबी (ट्यूबरकुलोसिस) के 10 मामले सामने आए हैं। कंपनी ने पुष्टि की कि पिछले साल सितंबर में 10 कर्मचारियों में नॉन-कंटेजियस (गैर-संचारी) लेटेंट टीबी की पुष्टि हुई, जिसे 'विक्टोरियन डिजीज' भी कहा जाता है।
यूनियन ने मांगा तत्काल बंद करने का फैसला
लगभग 3,000 कर्मचारियों वाले इस वेयरहाउस में मामलों के सामने आने के बाद जीएमबी यूनियन ने साइट को तुरंत बंद करने की मांग की है। यूनियन का कहना है कि कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए यह जरूरी है और जांच के दौरान पूर्ण वेतन दिया जाए।
अमेज़न ने स्पष्ट किया कि ये मामले संक्रामक नहीं हैं। कंपनी ने एनएचएस और यूके हेल्थ सिक्योरिटी एजेंसी (यूकेएचएसए) के मार्गदर्शन का पालन करते हुए प्रभावित कर्मचारियों को सूचित किया और सावधानी के तौर पर स्क्रीनिंग प्रोग्राम शुरू किया।
लेटेंट टीबी क्या है और क्यों चिंता?
लेटेंट टीबी में माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस बैक्टीरिया शरीर में मौजूद रहता है, लेकिन कोई लक्षण नहीं दिखाता और यह दूसरों में नहीं फैलता। व्यक्ति को बीमारी महसूस नहीं होती, लेकिन समय पर इलाज न होने पर यह एक्टिव टीबी में बदल सकता है।
एक्टिव टीबी के लक्षणों में तीन हफ्ते से ज्यादा खांसी, सीने में दर्द, खून वाली बलगम, थकान, वजन घटना, बुखार और रात में पसीना आना शामिल हैं।
फैलाव और जोखिम कारक
टीबी हवा में छोटी बूंदों से फैलता है, जब कोई एक्टिव टीबी वाला व्यक्ति खांसता या छींकता है। लेटेंट टीबी वाले व्यक्ति से संक्रमण नहीं फैलता। जोखिम बढ़ाने वाले कारक हैं - एक्टिव टीबी वाले व्यक्ति से निकट संपर्क, कमजोर इम्यून सिस्टम (एचआईवी, दवाओं या बीमारियों से), भीड़भाड़ वाली जगहों पर रहना या उच्च टीबी वाले क्षेत्रों से आना।
यूकेएचएसए के अनुसार, 2024 में ब्रिटेन में टीबी के मामले 13.6% बढ़े, लगभग 5,500 लोग प्रभावित हुए। डॉ. रोजर गजराज (यूकेएचएसए वेस्ट मिडलैंड्स) ने कहा कि कुल जोखिम कम है और टीबी एंटीबायोटिक्स से पूरी तरह ठीक हो जाता है।
अमेज़न का रुख और स्क्रीनिंग
अमेज़न ने कहा कि सितंबर 2025 में पहचाने गए मामलों के बाद कोई नया केस नहीं मिला। कंपनी ने "अबंडेंस ऑफ कै्यूशन" में स्क्रीनिंग बढ़ाई है और एनएचएस के साथ मिलकर निकट संपर्क में आए कर्मचारियों की जांच कर रही है। साइट सामान्य रूप से काम कर रही है।
यह घटना विक्टोरियन युग में व्यापक रही इस बीमारी के फिर से उभरने की याद दिलाती है, जब यह लाखों लोगों की जान ले चुकी थी। विशेषज्ञों का मानना है कि भीड़भाड़ वाले कार्यस्थलों में समय पर जांच और जागरूकता जरूरी है।







