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अमेरिका की चिंता: क्या भारत और रूस चीन के खेमे में चले गए?

विदेश डेस्क, श्रेया पांडेय |

संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक के बाद एक बड़ा बयान देकर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका ने भारत और रूस को "खो दिया" है और वे अब चीन के खेमे में चले गए हैं। यह टिप्पणी SCO की उस बैठक के संदर्भ में आई है जो चीन के तियानजिन में 5 सितंबर, 2025 को आयोजित हुई थी और जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भाग लिया था।

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पीएम मोदी, पुतिन और जिनपिंग की एक साथ तस्वीर साझा की और लिखा, "ईश्वर करे कि उनका भविष्य लंबा और समृद्ध हो!" इस पोस्ट को भारत, रूस और चीन के बीच बढ़ती नजदीकियों पर ट्रंप प्रशासन की नाराजगी के तौर पर देखा जा रहा है। ट्रंप ने चीन के राष्ट्रपति पर द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के 80 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित एक समारोह में उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन और रूस के व्लादिमीर पुतिन के साथ मिलकर अमेरिका के खिलाफ "साजिश" रचने का आरोप भी लगाया।

इस आरोप पर चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि किसी भी देश के साथ उनके राजनयिक संबंध किसी तीसरे पक्ष के खिलाफ नहीं हैं। वहीं, ट्रंप के शीर्ष व्यापार सलाहकार पीटर नवारो ने भारत, रूस और चीन के बीच के इस बंधन को "परेशान करने वाला" बताया। नवारो ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को रूस के साथ नहीं, बल्कि वाशिंगटन, यूरोप और यूक्रेन के साथ मिलकर काम करना चाहिए। नवारो ने तो यहां तक कहा कि भारत रूसी तेल की खरीद से यूक्रेन युद्ध को समर्थन दे रहा है और यह भारत के लोगों की कीमत पर कुछ खास लोगों को फायदा पहुंचा रहा है।

इन बयानों पर भारत सरकार ने सतर्कता से प्रतिक्रिया दी। भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने ट्रंप की सोशल मीडिया पोस्ट पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया, लेकिन उन्होंने नवारो के "गलत और भ्रामक बयानों" को पूरी तरह से खारिज कर दिया। भारत ने अपनी विदेश नीति की स्वायत्तता पर जोर देते हुए यह स्पष्ट कर दिया है कि वह अपनी राष्ट्रीय हितों के आधार पर निर्णय लेता है।

इन सबके बीच, ट्रंप प्रशासन ने भारत पर 25% का "पारस्परिक" टैरिफ भी लगा दिया है, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव बढ़ गया है। यह टैरिफ भारत के कई उत्पादों पर लागू होगा, जिसमें टेक्सटाइल, रत्न, चमड़ा और ऑटो पार्ट्स जैसे क्षेत्र शामिल हैं। यह कदम अमेरिका की "नेशन फर्स्ट" नीति का हिस्सा माना जा रहा है। इस पूरी घटना ने अमेरिका की यह चिंता उजागर कर दी है कि क्या भारत अपनी परंपरागत विदेश नीति से हटकर चीन और रूस के साथ एक नया धुरी बना रहा है।