नेशनल डेस्क, श्रेयांश पराशर l
नई दिल्ली। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इस समझौते को देशहित के खिलाफ बताते हुए कहा कि यह कदम दबाव में उठाया गया प्रतीत होता है और इससे भारत के किसानों, ऊर्जा सुरक्षा तथा डेटा संप्रभुता पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा कि संसद में अपने भाषण के दौरान उन्होंने जिजुत्सु का उदाहरण दिया था, जिसमें प्रतिद्वंद्वी की ताकत को उसी के खिलाफ इस्तेमाल किया जाता है। उनका कहना था कि भारत को भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी ताकत का रणनीतिक उपयोग करना चाहिए, न कि ऐसे समझौतों के जरिए खुद को कमजोर स्थिति में रखना चाहिए।
उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर अमेरिका को खुश करने के लिए भारतीय किसानों के हितों से समझौता क्यों किया गया। साथ ही उन्होंने यह भी पूछा कि तेल आयात से जुड़े निर्णयों में भारत की ऊर्जा सुरक्षा को पर्याप्त महत्व क्यों नहीं दिया गया। राहुल गांधी ने बिना किसी पारस्परिक लाभ के हर वर्ष अमेरिकी आयात बढ़ाने पर सहमति को भी चिंताजनक बताया।
कांग्रेस नेता ने आशंका जताई कि यह समझौता भारत को “डेटा कॉलोनी” बना सकता है, जहां भारतीय नागरिकों के डेटा पर विदेशी कंपनियों या शक्तियों का प्रभाव बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि देश की प्रतिभा और संसाधनों की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है और इस दिशा में स्पष्ट नीति सामने आनी चाहिए।
राहुल गांधी ने इस पूरे घटनाक्रम को शर्मनाक स्थिति बताते हुए कहा कि सरकार को पारदर्शिता बरतनी चाहिए और संसद में विस्तृत चर्चा करानी चाहिए। उन्होंने मांग की कि समझौते की शर्तों को सार्वजनिक किया जाए ताकि देश की जनता सच्चाई जान सके।
हालांकि, सरकार की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे को लेकर बहस तेज हो गई है।







