नेशनल डेस्क, आर्या कुमारी।
नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी की हवा में प्रदूषण केवल पीएम-10 और पीएम-2.5 तक सीमित नहीं है, बल्कि इनमें मौजूद 19 विषैले तत्व इसे और ज्यादा खतरनाक बना रहे हैं। अमेरिका स्थित नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के एक अध्ययन में सामने आया है कि दिल्ली की हवा में ऐसे कई तत्व मौजूद हैं, जो कैंसर समेत गंभीर बीमारियों का जोखिम बढ़ा सकते हैं।
अध्ययन में बताया गया है कि पीएम-2.5 कणों के भीतर एल्यूमिनियम, आयरन, लेड, आर्सेनिक, क्रोमियम, निकल, जिंक और मैंगनीज जैसे हानिकारक तत्व पाए गए हैं। ये तत्व सांस के जरिए सीधे शरीर में प्रवेश कर जाते हैं और फेफड़ों, हृदय व अन्य अंगों को नुकसान पहुंचाते हैं।
शोध के लिए जनवरी 2017-18 से जनवरी 2021-22 के बीच हवा के नमूनों का विश्लेषण किया गया। इसमें यह भी पाया गया कि अलग-अलग मौसम में इन तत्वों की मात्रा बदलती रहती है, लेकिन सालाना औसत के आधार पर सल्फर, क्लोरीन, पोटैशियम, कैल्शियम और आयरन की मौजूदगी सबसे ज्यादा समय तक बनी रहती है।
अध्ययन के अनुसार हवा में मौजूद इन विषैले तत्वों के प्रमुख स्रोत सड़क और मिट्टी की धूल, बायोमास व जीवाश्म ईंधन का दहन, वाहनों से निकलने वाला धुआं, औद्योगिक गतिविधियां और अन्य मिश्रित उत्सर्जन हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक इन स्रोतों पर प्रभावी नियंत्रण नहीं किया जाता, तब तक प्रदूषण से होने वाले स्वास्थ्य नुकसान को कम करना मुश्किल होगा।
शोधकर्ताओं ने साफ किया है कि प्रदूषण की गंभीरता को समझने के लिए केवल कणों की मात्रा नहीं, बल्कि उनमें मौजूद रासायनिक तत्वों पर भी ध्यान देना जरूरी है। यही वजह है कि यह अध्ययन हवा की गुणवत्ता और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।







