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अमेरिकी प्रतिबंधों का ईरान देगा जवाब

विदेश डेस्क, आर्या कुमारी।

तेहरान। ईरान ने अमेरिका की ओर से लगाए गए नए आर्थिक प्रतिबंधों के बीच कहा है कि वह बढ़ते दबाव के सामने झुकने वाला नहीं है। ईरानी सरकार ने माना है कि देश इस समय गंभीर आर्थिक चुनौतियों से गुजर रहा है, लेकिन सरकार का कहना है कि मजबूत इरादे, एकजुटता और सही रणनीति के जरिए इन मुश्किलों से बाहर निकला जा सकता है। अमेरिका ने हाल ही में ईरान के खिलाफ आर्थिक दबाव बढ़ाते हुए करीब 60 लोगों, संस्थाओं और जहाजों पर नए प्रतिबंध लगाए हैं।

ईरानी सरकार की प्रवक्ता फातेमेह मोहाजेरानी ने कहा कि सरकार और राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन देश को मौजूदा मुश्किल परिस्थितियों से निकालने के लिए समझदारी और दृढ़ संकल्प के साथ काम कर रहे हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि ईरान की अर्थव्यवस्था कई तरह के दबावों का सामना कर रही है, लेकिन सरकार का मानना है कि परिस्थितियों से निपटने के लिए प्रभावी फैसले लिए जा सकते हैं। उनका यह बयान अमेरिका की ओर से नए आर्थिक प्रतिबंधों और दबाव की घोषणा के बाद सामने आया है।

मोहाजेरानी के मुताबिक, ईरान इस संकट का सामना अकेले नहीं बल्कि राष्ट्रीय एकजुटता के साथ करने की कोशिश करेगा। सरकार का दावा है कि मौजूदा आर्थिक परेशानियों के बावजूद देश की व्यवस्था को स्थिर रखने और प्रतिबंधों के प्रभाव को कम करने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं। ईरानी नेतृत्व का कहना है कि अमेरिकी दबाव के बावजूद देश अपनी आर्थिक गतिविधियों को जारी रखने के रास्ते तलाशता रहेगा।

ईरान के अर्थव्यवस्था मंत्री अली मदनीजादेह ने भी अमेरिका के नए प्रतिबंधों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि ईरान पहले से ही ऐसे आर्थिक दबावों से निपटने की तैयारी कर रहा है और नए प्रतिबंधों का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है। उनका दावा है कि अमेरिका ईरान की आर्थिक गतिविधियों को पूरी तरह से रोकने में सफल नहीं हो सकता। उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन की सरकार ने संभावित नए प्रतिबंधों को ध्यान में रखते हुए पहले से ही तैयारी शुरू कर रखी थी।

अमेरिका की ओर से 24 अगस्त को ईरान के खिलाफ आर्थिक दबाव बढ़ाने के नए अभियान की घोषणा की गई। इसके तहत ईरान की तेल से होने वाली आय, वित्तीय नेटवर्क और दूसरे आर्थिक माध्यमों पर दबाव बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। नए प्रतिबंधों में करीब 60 लोगों, संस्थाओं और जहाजों को निशाना बनाया गया है। साथ ही दूसरे देशों और कंपनियों को भी चेतावनी दी गई है कि अगर वे ईरान के साथ कारोबार जारी रखते हैं तो उन्हें अमेरिकी वित्तीय व्यवस्था से बाहर किए जाने का जोखिम उठाना पड़ सकता है।

ईरान पहले से ही लंबे समय से अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना कर रहा है और इनका असर उसकी अर्थव्यवस्था पर लगातार दिखाई देता रहा है। देश में महंगाई, मुद्रा की कमजोरी और आर्थिक गतिविधियों पर दबाव जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं। ऐसे समय में लगाए गए नए प्रतिबंधों से ईरान की आर्थिक स्थिति पर और दबाव बढ़ने की आशंका है। अमेरिका का उद्देश्य ईरान को अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था से और अधिक अलग करना तथा उसकी आय के प्रमुख स्रोतों पर नियंत्रण मजबूत करना है।

हालांकि, ईरानी सरकार ने साफ किया है कि वह अमेरिकी दबाव के आगे झुकने के बजाय मौजूदा परिस्थितियों का मुकाबला करने की रणनीति पर काम करेगी। ईरान के अधिकारियों का कहना है कि देश के पास प्रतिबंधों के प्रभाव को कम करने और आर्थिक गतिविधियों को जारी रखने के अपने तरीके हैं। सरकार ने संकेत दिया है कि मुश्किल आर्थिक हालात के बावजूद वह एकजुटता और मजबूत इच्छाशक्ति के साथ आगे बढ़ेगी।