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अमेरिकी मध्यावधि चुनाव आज, भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं पर टिकी नजरें

विदेश डेस्क, आर्या कुमारी।

वॉशिंगटन। अमेरिका में आज मध्यावधि चुनाव के लिए मतदान हो रहा है। इस चुनाव में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की नीतियों और उनके राजनीतिक प्रभाव की परीक्षा होगी। अमेरिकी संसद यानी कांग्रेस के दोनों सदनों प्रतिनिधि सभा और सीनेट पर नियंत्रण हासिल करने के लिए रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टियों के बीच मुकाबला है। इस बार चुनाव में भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं की भूमिका भी काफी अहम मानी जा रही है। माना जा रहा है कि कई करीबी मुकाबलों में इस समुदाय के वोट नतीजों को प्रभावित कर सकते हैं।

अमेरिका में करीब 52 लाख भारतीय-अमेरिकी आबादी वाला समुदाय अब केवल आर्थिक और पेशेवर क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि राजनीतिक रूप से भी अपनी मजबूत पहचान बना चुका है। कई चुनावी क्षेत्रों में इसकी बढ़ती भागीदारी ने इसे प्रभावशाली मतदाता समूह बना दिया है। यही वजह है कि दोनों प्रमुख राजनीतिक दल इस समुदाय के रुख और मतदान के फैसले पर नजर बनाए हुए हैं।

अमेरिका में एशियाई-अमेरिकी मतदाता सबसे तेजी से बढ़ने वाले समूहों में शामिल हैं। इनमें भारतीय मूल के लोगों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। कैलिफोर्निया और न्यूयॉर्क जैसे पारंपरिक रूप से डेमोक्रेटिक राज्यों के अलावा भारतीय-अमेरिकी बड़ी संख्या में टेक्सास, जॉर्जिया, वर्जीनिया, पेनसिल्वेनिया, मिशिगन और एरिजोना जैसे राज्यों में भी रह रहे हैं।

इनमें से कई राज्य स्विंग स्टेट्स माने जाते हैं, जहां दोनों राजनीतिक दलों के बीच मुकाबला बेहद करीबी रहता है। ऐसे राज्यों में चुनावी नतीजे अक्सर कुछ सौ या हजार वोटों के अंतर से तय होते हैं। ऐसे में भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं की संख्या और उनकी मतदान में भागीदारी उम्मीदवारों की जीत-हार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं के राजनीतिक रुझान को लेकर हाल के सर्वेक्षणों में डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रति अधिक समर्थन दिखाई दिया है। आंकड़ों के मुताबिक, करीब 62 से 66 प्रतिशत भारतीय-अमेरिकी मतदाता कांग्रेस चुनाव में डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान करने का इरादा रखते हैं। वहीं, लगभग 30 प्रतिशत मतदाताओं का झुकाव रिपब्लिकन पार्टी की ओर बताया गया है।

हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में भारतीय-अमेरिकी समुदाय के एक वर्ग में डोनाल्ड ट्रंप के प्रति समर्थन भी बढ़ा है। खासकर रूढ़िवादी मुद्दों और कर नीतियों के कारण कुछ मतदाता रिपब्लिकन पार्टी की ओर आकर्षित हुए हैं। इसके बावजूद, सर्वेक्षणों के अनुसार समुदाय का बड़ा हिस्सा अब भी डेमोक्रेटिक पार्टी की नीतियों के साथ अधिक सहज महसूस करता है।
मध्यावधि चुनाव ट्रंप के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि इन्हें आमतौर पर मौजूदा राष्ट्रपति के कामकाज पर जनता की राय के रूप में देखा जाता है। इन चुनावों में यदि रिपब्लिकन पार्टी प्रतिनिधि सभा या सीनेट में अपना नियंत्रण खो देती है तो ट्रंप के लिए अपने बाकी कार्यकाल में मनचाहे कानून पारित कराना मुश्किल हो सकता है।

इसका असर उनकी प्रमुख नीतियों पर भी पड़ सकता है। इसमें करों में कटौती, आव्रजन से जुड़े कड़े फैसले और सरकार के अन्य विधायी एजेंडे शामिल हैं। ऐसे में कांग्रेस में रिपब्लिकन पार्टी की स्थिति ट्रंप की आगे की राजनीतिक और प्रशासनिक योजनाओं के लिए काफी अहम होगी।

भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं के फैसले को प्रभावित करने वाले प्रमुख मुद्दों में आव्रजन और वीजा नीतियां शामिल हैं। ट्रंप प्रशासन की सख्त आव्रजन नीतियों, अमेरिका में कानूनी रूप से रहने और स्थायी रूप से बसने की प्रक्रिया तथा एच-1बी वीजा से जुड़े फैसलों का इस समुदाय पर सीधा असर पड़ता है। भारतीय मूल के कई पेशेवर एच-1बी वीजा के माध्यम से अमेरिका में काम करते हैं। ऐसे में वीजा नियमों और आव्रजन व्यवस्था को लेकर समुदाय के भीतर चिंताएं बनी हुई हैं।

महंगाई और जीवन-यापन का बढ़ता खर्च भी भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं के लिए महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। स्वास्थ्य सेवाओं की लागत, रोजगार और आर्थिक स्थिति को लेकर उनकी चिंताएं अन्य अमेरिकी नागरिकों जैसी ही हैं। यदि मौजूदा प्रशासन की आर्थिक नीतियों से असंतुष्ट मतदाता डेमोक्रेटिक पार्टी के समर्थन में एकजुट होते हैं तो इसका असर रिपब्लिकन पार्टी के चुनावी प्रदर्शन पर पड़ सकता है।

भारत और अमेरिका के संबंध भी इस समुदाय के लिए महत्वपूर्ण चुनावी मुद्दों में शामिल हैं। दोनों देशों के बीच रक्षा, तकनीक और रणनीतिक साझेदारी को लेकर रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक दोनों दलों में व्यापक समर्थन रहा है। इसके बावजूद भारतीय-अमेरिकी मतदाता इस बात पर भी ध्यान देते हैं कि अमेरिकी संसद में भारत के हितों और दोनों देशों के संबंधों को लेकर किस तरह की नीतियां अपनाई जाती हैं।
अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में राष्ट्रपति को सीधे पद से नहीं हटाया जाता, लेकिन इसके नतीजे यह तय करते हैं कि व्हाइट हाउस को संसद में कितना समर्थन मिलेगा। यदि विपक्षी दल कांग्रेस के किसी सदन में बहुमत हासिल कर लेता है तो राष्ट्रपति के लिए अपने एजेंडे को आगे बढ़ाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

ऐसे में भारतीय-अमेरिकी मतदाता केवल चुनाव में भाग लेने वाला एक समुदाय नहीं हैं, बल्कि कई महत्वपूर्ण सीटों पर नतीजों को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं। खासकर उन क्षेत्रों में जहां रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों के बीच कड़ा मुकाबला है, वहां इस समुदाय की मतदान में भागीदारी निर्णायक साबित हो सकती है। इस चुनाव के नतीजों से न केवल ट्रंप की राजनीतिक स्थिति, बल्कि उनकी पार्टी के भविष्य और आने वाले समय के राजनीतिक एजेंडे की दिशा भी तय होगी।