नेशनल डेस्क , मुस्कान सिंह।
नई दिल्ली: थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने मंगलवार को बदलते वैश्विक हालात के बीच भारत को आत्मनिर्भर, रणनीतिक रूप से मजबूत और तकनीकी रूप से सक्षम राष्ट्र बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश को अब पारंपरिक शक्ति के साथ-साथ “स्मार्ट पावर” मॉडल को अपनाना होगा, जो सुरक्षा, तकनीक, उद्योग, कूटनीति और नवाचार पर आधारित हो।
नई दिल्ली में आयोजित “सुरक्षा से समृद्धि : निरंतर राष्ट्रीय विकास के लिए स्मार्ट पावर” विषयक संगोष्ठी को संबोधित करते हुए सेना प्रमुख ने कहा कि आज की वैश्विक परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं और भारत को हर चुनौती के लिए पहले से तैयार रहना होगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा केवल सीमाओं की रक्षा तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि इसका सीधा संबंध आर्थिक मजबूती, तकनीकी विकास और रणनीतिक स्वायत्तता से भी जुड़ चुका है।
जनरल द्विवेदी ने कहा कि भारत को आत्मनिर्भरता और रणनीतिक स्वतंत्रता के आधार पर अपनी शक्ति संरचना तैयार करनी होगी। उन्होंने रक्षा उत्पादन, आधुनिक तकनीक, साइबर सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और नवाचार को आने वाले समय की सबसे बड़ी जरूरत बताया। सेना प्रमुख के अनुसार भारत को रक्षा क्षेत्र में विदेशी निर्भरता कम करते हुए स्वदेशी तकनीक और घरेलू रक्षा उद्योग को मजबूत करना होगा।
उन्होंने कहा कि वर्तमान भू-राजनीतिक माहौल में केवल सैन्य शक्ति पर्याप्त नहीं है, बल्कि आर्थिक, औद्योगिक और कूटनीतिक ताकत का संतुलित विकास भी जरूरी है। भारत यदि तेजी से आगे बढ़ना चाहता है तो सभी क्षेत्रों में एकजुट होकर काम करना होगा।
अपने संबोधन में सेना प्रमुख ने युवाओं, स्टार्टअप्स और उद्योग जगत की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र में नवाचार और नई तकनीकों के जरिए भारत वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बना सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि देश को भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए तेज फैसले लेने और नई रणनीतियों पर काम करने की जरूरत है।
जनरल द्विवेदी ने कहा, “इतिहास उनका इंतजार नहीं करता जो तैयारी नहीं करते। इतिहास उन्हीं का साथ देता है जो समय से पहले खुद को तैयार कर लेते हैं।” उन्होंने कहा कि भारत लगातार नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है, लेकिन बदलते वैश्विक हालात में देश को और अधिक तेज, मजबूत और आत्मनिर्भर बनने की जरूरत है। उन्होंने जोर देकर कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक विकास और तकनीकी प्रगति एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। ऐसे में भारत को रक्षा, उद्योग, तकनीक और कूटनीति के क्षेत्र में संतुलित और दीर्घकालिक रणनीति के साथ आगे बढ़ना होगा, ताकि भविष्य की हर चुनौती का मजबूती से सामना किया जा सके।







