Ad Image
Ad Image
युद्ध समाप्ति पर ईरान के साथ सकारात्मक बातचीत हुई: राष्ट्रपति ट्रंप || बिहार: विजय कुमार सिन्हा, निशांत कुमार, दिलीप जायसवाल, दीपक प्रकाश समेत 32 ने ली शपथ || बिहार में सम्राट सरकार का विस्तार, 32 मंत्रियों ने ली पद और गोपनीयता की शपथ || वोट चोरी का जिन्न फिर निकला, राहुल गांधी का EC और केंद्र सरकार पर हमला || वियतनामी राष्ट्रपति तो लाम पहुंचे भारत, राष्ट्रपति भवन में पारंपरिक स्वागत || टैगोर जयंती पर 9 मई को बंगाल में भाजपा सरकार के शपथ ग्रहण की संभावना || केरल में सरकार गठन की कवायद तेज: अजय माकन और मुकुल वासनिक पर्यवेक्षक || असम में बीजेपी जीत के हैट्रिक की ओर, 101 से अधिक पर बढ़त, कांग्रेस 23 पर सिमटी || पांच राज्यों में मतगणना जारी: बंगाल, असम में भाजपा को बढ़त, केरल में कांग्रेस और तमिलनाडु में टीवीके को बढ़त || तमिलनाडु चुनाव: एक्टर विजय की टीवीके ने किया उलटफेर, 109 सीटो पर बढ़त

The argument in favor of using filler text goes something like this: If you use any real content in the Consulting Process anytime you reach.

  • img
  • img
  • img
  • img
  • img
  • img

Get In Touch

आत्मसत्ता के परमात्मसत्ता के मिलन से ही पूर्णता: बिमल सर्राफ

लोकल डेस्क, ऋषि राज।

रक्सौल: आध्यात्मिक प्रयासों की परिणिति आत्मसत्ता के परमात्मसत्ता के साथ मिलन के साथ परिपूर्ण हो पाती है।

उक्त विचार लायंस क्लब ऑफ रक्सौल के अध्यक्ष सह मीडिया प्रभारी एवं भारत विकास परिषद्, रक्सौल के सेवा संयोजक सह मीडिया प्रभारी सह सामाजिक कार्यकर्ता बिमल सर्राफ ने प्रेस से साझा किया।आध्यात्मिक साधना में हमारे अस्तित्व में और परमात्मा के अस्तित्व में अंतर नहीं रह जाता।दोनों पर एक जैसा रंग चढ़ जाता है या यों कहें कि हमारा व्यक्तित्व भी परमात्मा के रंग में रंग उठता है।सुनने में-जानने में ऐसा होना अत्यंत आकर्षक लगता है,पर इसके साथ का सत्य यह भी है कि हमारे व्यक्तित्व पर ईश्वरीय उपस्थिति का रंग चढ़े,उसके लिए यह आवश्यक है कि हमारे व्यक्तित्व की धुलाई हो सके।जिस प्रकार कपड़े पर नया रंग चढ़ाने के लिए,पहले उसकी गंदगी को धोना और फिर उस पर नया रंग चढ़ाना संभव हो पाता है - उसी प्रकार , मानवीय व्यक्तित्व पर दैवी अनुग्रह का रंग चढ़ाने से पहले व्यक्तित्व की धुलाई और रंगाई जरूरी हो जाती है।

यहाँ धुलाई की तुलना प्रायश्चित से व रंगाई की तुलना साधना से कर सकते हैं।हमारे चित्त पर,अवचेतन पर,पूर्वजन्मों के किए गए कुकर्मों ,कुसंस्कारों के मैल की परत चढ़ जाती है।इस मलिनता को दूर करने के लिए, प्रायश्चित विधान का स्वरूप हमारे शास्त्रों में निर्धारित किया गया है।पाप का प्रकटीकरण,पाप को हल्का करता है और चित्त पर छाए हुए कलुष से मुक्ति भी दिलाता है।जिस प्रकार धुलाई का कार्य धोबी का है,उसी प्रकार इन पापों का प्रायश्चित ,गुरु जैसी मार्गदर्शक सत्ता के सान्निध्य में करने की परंपरा है। प्रायश्चित साधना द्वारा इन कर्मों के बोझ से मुक्ति होते ही - व्यक्तित्व पर साधना द्वारा दैवी रंग चढ़ा देने का प्रावधान है।इन दोनों प्रक्रियाओं के पूर्ण होते ही व्यक्तित्व प्रकाशित हो उठता और अंतर्मन पर ईश्वरीय प्रकाश का रंग चढ़ जाता है।यही जीवन के सृजन का मूल तत्व है।